साइबर अपराध और फर्जी ‘डिजिटल अरेस्ट’ के बढ़ते मामलों को देखते हुए CBI ने एक बड़ी सुरक्षा पहल शुरू की है। अब 1 मई से CBI द्वारा जारी किए जाने वाले हर आधिकारिक नोटिस पर एक खास क्यूआर कोड लगा होगा। इसके साथ ही CBI ने ‘अभय’ नाम का एक AI-आधारित चैटबॉट लॉन्च किया है। इस तकनीक की मदद से आम नागरिक किसी भी संदिग्ध नोटिस, मैसेज या दस्तावेज की असलियत को तुरंत जांच सकेंगे। इस कदम का मुख्य उद्देश्य उन जालसाजों पर लगाम लगाना है जो खुद को CBI अधिकारी बताकर भोले-भले लोगों को डराते हैं और उनसे पैसे ऐंठते हैं।
‘अभय’ चैटबॉट क्या है और कैसे काम करता है?
‘अभय’ एक AI पर आधारित टूल है, जिसे विशेष रूप से साइबर फ्रॉड से बचने के लिए बनाया गया है। यदि किसी व्यक्ति को कोई संदिग्ध नोटिस या मैसेज प्राप्त होता है, तो वह उसे इस ऐप या चैटबॉट पर अपलोड कर सकता है। AI सिस्टम उस दस्तावेज की बारीकी से जांच करेगा और तुरंत बता देगा कि वह CBI द्वारा जारी किया गया असली नोटिस है या किसी ठग द्वारा बनाया गया फर्जी कागज।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम से मिलेगी सुरक्षा
आजकल ठग खुद को पुलिस या CBI अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल करते हैं और उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी देकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते हैं। इस चैटबॉट को ऐसे ही फर्जीवाड़ों के खिलाफ एक ‘सुरक्षा कवच’ के रूप में तैयार किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह तकनीक सही समय पर उठाया गया कदम है, जो लोगों को डराने-धमकाने वाले अपराधियों की पहचान करने में मदद करेगी।
नोटिस फर्जी पाए जाने पर क्या करें?
CBI ने स्पष्ट सलाह दी है कि यदि ‘अभय’ चैटबॉट किसी नोटिस को फर्जी बताता है, तो घबराएं नहीं और न ही कोई भुगतान करें। ऐसी स्थिति में तुरंत संबंधित साइबर क्राइम पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करें या स्थानीय पुलिस को सूचित करें। साथ ही, उस संदिग्ध कॉल या मैसेज को ब्लॉक कर दें। भविष्य में इस टूल को मोबाइल फोन में डिफॉल्ट रूप से शामिल करने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि जागरूकता और सुरक्षा हर नागरिक तक पहुंच सके।

