देहरादून। पहाड़ों की रानी मसूरी में पर्यटकों की संख्या लगातार बेकाबू होती जा रही है, लेकिन इसके मुकाबले सड़क, पानी, पार्किंग और कचरा प्रबंधन जैसी बुनियादी सुविधाओं की क्षमता बढ़ाने में प्रशासन नाकाम रहा है। वर्ष 2000 में जहां इस हिल स्टेशन पर लगभग साढ़े आठ लाख पर्यटक पहुंचे थे, वहीं वर्ष 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 15,94,221 तक पहुंच गया है। महज 30 हजार की स्थाई आबादी वाले इस संवेदनशील क्षेत्र में क्षमता से अधिक पर्यटकों के आने से स्थानीय व्यवस्थाएं चरमराने लगी हैं।
उत्तराखंड गठन के बाद से पर्यटन विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो पर्यटकों के आगमन में भारी उछाल दर्ज किया गया है। वर्ष 2019 में रिकॉर्ड 27,69,272 पर्यटक मसूरी पहुंचे थे, हालांकि कोविड काल के दौरान वर्ष 2020 में यह संख्या घटकर 10,16,337 पर आ गई थी। इसके बाद वर्ष 2024 में 21,34,626 और वर्ष 2025 में 15,94,221 सैलानी यहां पहुंचे। पर्यटन सीजन या लंबी छुट्टियों के दौरान एक साथ हजारों वाहनों के पहुंचने से सीमित पार्किंग और सीवेज व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ता है।
मसूरी की वहन क्षमता को लेकर पिछले 25 वर्षों में कई अध्ययन और रिपोर्ट्स तैयार की गईं, लेकिन धरातल पर कोई ठोस नीति लागू नहीं हो सकी। वर्ष 2001 में एलबीएस अकादमी द्वारा पहला अध्ययन कराया गया था, जिसे 2011 में अपडेट किया गया था। इसके बाद जनवरी 2023 में जोशीमठ भू-धंसाव की घटना के बाद एनजीटी के निर्देश पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया था।
इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में पर्यटकों की संख्या सीमित करने, बड़े निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच, बहुमंजिला भवनों के नियमित परीक्षण और प्राकृतिक जल निकासी को दुरुस्त करने जैसी कई अहम सिफारिशें दी थीं। हालांकि, विडंबना यह है कि इतने महत्वपूर्ण सुझाव और नीतियां आज भी केवल सरकारी फाइलों और कागजों तक ही सीमित बनकर रह गई हैं, जिसका खामियाजा पूरे शहर को भुगतना पड़ रहा है।
वर्तमान में वीकेंड और तीन-तीन दिनों की छुट्टियों के दौरान मसूरी पर्यटकों से पूरी तरह गुलजार नजर आ रहा है। होटल एसोसिएशन के मुताबिक अधिकांश होटलों में 70 प्रतिशत तक एडवांस बुकिंग हो चुकी है, जिससे स्थानीय कारोबारियों को आर्थिक राहत जरूर मिली है। लेकिन दूसरी ओर, अनियंत्रित निर्माण कार्यों, जंगलों के कटान और ट्रैफिक के बढ़ते दबाव के कारण मसूरी में भूस्खलन और पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं।

