AIIMS ऋषिकेश में 800 से अधिक बुजुर्गों ने लगवाया सुरक्षा कवच, जानिए कौन से टीके हैं अहम

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यदि आपकी उम्र 50 वर्ष को पार कर चुकी है, तो अब केवल दवाओं के भरोसे रहने के बजाय वयस्क टीकाकरण अपनाना बेहद जरूरी हो गया है। चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक, जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है, जिसके कारण निमोनिया, फ्लू और अन्य खतरनाक संक्रमणों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि बचपन में लगाए गए टीकों का असर उम्र के साथ धीरे-धीरे कम हो जाता है, इसलिए 50 वर्ष के बाद शरीर को एक नए ‘सुरक्षा कवच’ की आवश्यकता होती है। एम्स ऋषिकेश में वयस्क टीकाकरण की यह विशेष सुविधा उपलब्ध है।

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जहां पिछले पांच महीनों के भीतर ही 800 से अधिक बुजुर्गों और वयस्कों ने स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए टीके लगवाए हैं। इस उम्र में मुख्य रूप से सांस और फेफड़ों के संक्रमण से बचाव के लिए और मौसमी फ्लू से सुरक्षा के लिए के टीकों को 50+ आयु वर्ग के लोगों के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना गया है।

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इसके अलावा टिटनस, हेपेटाइटिस और चिकन पॉक्स के टीकों की भी सलाह दी जाती है। यह टीकाकरण विशेष रूप से उन बुजुर्गों, डायबिटीज के मरीजों और लगातार विदेश या हज यात्रा करने वाले लोगों के लिए अनिवार्य है जिनकी इम्युनिटी बेहद कमजोर है।

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एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने बताया कि उम्र बढ़ने के साथ संक्रमण की गंभीरता को कम करने में वयस्क टीकाकरण बेहद प्रभावी साबित होता है, जिससे समय रहते अस्पताल में भर्ती होने जैसी गंभीर नौबत से आसानी से बचा जा सकता है।