देहरादून। एमबीबीएस राज्य कोटे के दाखिलों के लिए प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों की जांच के दौरान एक ही प्रमाण पत्र संख्या के दो अलग-अलग नामों से जुड़े होने का बेहद गंभीर मामला सामने आया है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप बहुगुणा ने शुक्रवार को प्रेस क्लब में एक प्रेसवार्ता के दौरान हरिद्वार मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने वाले एक अभ्यर्थी के स्थायी निवास प्रमाण पत्र की प्रामाणिकता पर तीखे सवाल खड़े किए। इस बड़े खुलासे के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग और काउंसलिंग प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।
प्रदीप बहुगुणा का दावा है कि उनके द्वारा की गई ऑनलाइन जांच में जो प्रमाण पत्र संख्या सामने आई, वही समान संख्या ऊखीमठ की एक युवती के नाम पर भी जारी पाई गई। उन्होंने इन दोनों दस्तावेजों के मूल सरकारी रिकॉर्ड से तत्काल और निष्पक्ष मिलान कराने की मांग उठाई है। इसके साथ ही उन्होंने एक अन्य मामले का हवाला देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश के एक अभ्यर्थी को ओबीसी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के तहत सीट आवंटित किए जाने में भी स्पष्ट रूप से गड़बड़ी की गई है।
उनके अनुसार, संबंधित अभ्यर्थी ने चमोली के नारायणबगढ़ में प्रमाण पत्र के लिए सितंबर माह में आवेदन किया था, जबकि उसे सीट आवंटन के समय तक विधिवत प्रमाण पत्र जारी ही नहीं हुआ था। उन्होंने आवेदन की तारीख, प्रमाण पत्र जारी होने की तिथि और सीट आवंटन की तारीखों की गहन उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। इन तमाम अनियमितताओं के उजागर होने से राज्य कोटे के तहत होने वाले मेडिकल प्रवेश की पूरी प्रक्रिया और छात्रों पर इसका सीधा असर पड़ा है।
प्रेसवार्ता में नीट-यूजी स्टेट काउंसलिंग के दौरान राज्य कोटे की पात्रता के नियमों को लेकर भी तीखे सवाल उठाए गए। बहुगुणा का कहना है कि उत्तराखंड से केवल 10वीं और 12वीं की परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थी बिना स्थायी निवास प्रमाण पत्र के भी काउंसलिंग में शामिल होकर राज्य कोटे की सीट पर दावा कर सकते हैं, हालांकि उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिलता। इस पर विश्वविद्यालय प्रशासन का अपना पक्ष है कि शासन स्तर से जारी शासनादेश के निर्धारित नियमों के अनुसार ही यह पूरी व्यवस्था संचालित की जा रही है, जो समूह ग की परीक्षाओं में भी लागू होती है।
बड़ी संख्या में शिकायतों के बावजूद जांच का दायरा सीमित रखने पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूरे मामले की जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति से कराने की मांग की है। इस बीच, चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. विजय जुयाल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि प्रथम और द्वितीय चरण के प्रवेशित तथा फ्लोट अभ्यर्थियों के मूल अभिलेख सत्यापन हेतु संबंधित जिलों को भेजे जा चुके हैं। जिलों से प्राप्त आधिकारिक जांच रिपोर्ट के आधार पर अब तक कुल 19 अभ्यर्थियों का सीट आवंटन निरस्त किया जा चुका है, और यह पूरी प्रक्रिया 15 से अधिक सदस्यों वाले काउंसलिंग बोर्ड द्वारा पारदर्शी तरीके से संचालित की जाती है।

