देहरादून। देहरादून जिले में पिछले कई दिनों से जारी पटवारियों और लेखपालों के कार्य बहिष्कार का सीधा असर अब आम जनता पर दिखने लगा है, जिससे तहसीलों में विभिन्न प्रमाण पत्रों के आवेदन और सत्यापन का काम पूरी तरह रुक गया है। मूल निवास, स्थायी निवास, आय और चरित्र प्रमाण पत्र समय पर न बन पाने के कारण आम नागरिक लगातार तहसीलों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। इस गतिरोध से मरीजों के इलाज, बच्चों के दाखिले और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में भारी अड़चन आ रही है।
इस पूरे विवाद का मुख्य कारण पिछले महीने देहरादून में सामने आया फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए एमबीबीएस में प्रवेश का मामला है। मामले में दो पटवारियों के निलंबन के बाद उत्तराखंड लेखपाल संघ ने कड़ा ऐतराज जताते हुए आंदोलन का रास्ता चुना है। संघ की घोषणा के बाद 25 सितंबर से ही देहरादून और डोईवाला सहित जिले की चारों प्रमुख तहसीलों में पटवारियों ने कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया था।
हड़ताल के चलते प्रमाण पत्र जारी करने की पूरी व्यवस्था ठप पड़ी है, हालांकि भूलेख संबंधी काम जारी रखे गए हैं। दस्तावेजों की जांच न होने से आवेदन लगातार लंबित हो रहे हैं और तहसील पहुंचने वाले लोगों को कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल पा रहा है। तहसील अध्यक्ष प्रदीप सिंह के अनुसार, पिछले छह महीनों में पटवारियों द्वारा करीब 1.18 लाख प्रमाण पत्र बनाए गए थे और रोजाना औसतन 60 प्रमाण पत्र जारी होते थे, लेकिन वर्तमान हड़ताल से सरकारी कामकाज पूरी तरह प्रभावित हुआ है।
पटवारियों के इस रुख से आम लोगों को भारी दुश्वारियां झेलनी पड़ रही हैं। राजा रोड निवासी दीपांश भटनागर अपने पिता के इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड बनवाने हेतु पिछले 20 दिनों से स्थायी निवास प्रमाण पत्र के लिए परेशान हैं, लेकिन हड़ताल के कारण उनके पिता का इलाज प्रभावित हो रहा है। इसी तरह एमकेपी क्षेत्र के पार्षद रोहन चंदेल भी करीब एक महीने से अपने चरित्र प्रमाण पत्र के लिए तहसील के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई सन्तोषजनक जवाब नहीं मिल पा रहा है।
उत्तराखंड लेखपाल संघ ने सेवा का अधिकार अधिनियम के तहत फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल पर अंकुश लगाने और पूरी व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई है। जिलाधिकारी को भेजे पत्र में संघ ने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। संघ के जिलाध्यक्ष जयपाल रावत और तहसील अध्यक्ष प्रदीप सिंह ने सुझाव दिया है कि आवेदन के साथ ही सीएससी केंद्र का शपथ पत्र अनिवार्य किया जाए तथा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए ओटीपी और बायोमेट्रिक आधारित प्रणाली लागू की जाए।

