जनगणना ड्यूटी से राहत पाना अब आसान नहीं; मेडिकल बोर्ड की मंजूरी हुई अनिवार्य

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उत्तराखंड में जनगणना के कार्य में लगे सरकारी कर्मचारियों के लिए सरकार ने नियमों को और कड़ा कर दिया है। अब बीमारी के आधार पर जनगणना ड्यूटी कटवाने के लिए केवल साधारण मेडिकल सर्टिफिकेट काफी नहीं होगा; इसके लिए स्टेट मेडिकल बोर्ड की मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया गया है। बड़ी संख्या में कर्मचारियों द्वारा ड्यूटी से छूट के लिए आवेदन करने के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है ताकि केवल वास्तविक रूप से अस्वस्थ कर्मचारियों को ही राहत मिले और जनगणना का कार्य सुचारू रूप से चलता रहे।

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बड़ी संख्या में आ रहे आवेदन बने चुनौती

राज्य में वर्तमान में 30 हजार से अधिक सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी जनगणना में लगाई गई है। जनगणना निदेशालय के अनुसार, प्रशासनिक अधिकारियों, एसडीएम और तहसीलदारों के पास बड़ी संख्या में ऐसे आवेदन पहुंच रहे हैं जिनमें स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर ड्यूटी हटाने की मांग की गई है। इस बढ़ते दबाव को देखते हुए अब बिना मेडिकल बोर्ड के प्रमाण पत्र के किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा।

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निदेशक जनगणना का सख्त रुख

जनगणना निदेशक आशीष श्रीवास्तव के अनुसार, ड्यूटी से छूट के आवेदनों की जांच के लिए अब एक व्यवस्थित प्रक्रिया अपनाई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि बीमारी की स्थिति में मेडिकल बोर्ड की जांच के बाद ही किसी कर्मचारी को राहत दी जाएगी। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में जनशक्ति की कमी न हो और काम में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।

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आवेदन की प्रक्रिया और समस्या

रिपोर्ट के मुताबिक, कई कर्मचारी सीधे उच्चाधिकारियों या अपने चार्ज ऑफिसर के पास सिफारिश और आवेदन लेकर पहुंच रहे हैं। अधिकारियों के सामने आ रही इस मुश्किल को हल करने के लिए अब “स्टेट मेडिकल बोर्ड की मंजूरी” को एक फिल्टर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।

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