उत्तराखंड के शहरों की सूरत बदलने के लिए सरकार ने ‘अर्बन चैलेंज फंड’ के तहत एक बड़ी योजना तैयार की है। इसके माध्यम से राज्य के सभी 108 नगर निकायों को क्रेडिट रीपेमेंट गारंटी योजना का लाभ मिलेगा। इस योजना की सबसे खास बात यह है कि अगर नगर निकाय विकास कार्यों के लिए बैंक से लोन लेते हैं, तो उसका 50% हिस्सा सरकार (25% केंद्र और 25% राज्य) वहन करेगी। इससे सीमित संसाधनों वाले छोटे निकाय भी अब बड़े प्रोजेक्ट्स शुरू कर सकेंगे, जिससे शहरों में आधुनिक सुविधाएं और बुनियादी ढांचा विकसित होगा।
विकास के तीन प्रमुख क्षेत्र
इस योजना के तहत शहरी विकास को तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है:
- जल एवं स्वच्छता: इसके अंतर्गत शुद्ध पेयजल आपूर्ति, सीवरेज नेटवर्क और कूड़ा निस्तारण (वेस्ट मैनेजमेंट) जैसे महत्वपूर्ण कार्यों पर ध्यान दिया जाएगा।
- रचनात्मक पुनर्विकास: पुराने बाजारों, ऐतिहासिक विरासत स्थलों और सार्वजनिक स्थानों का आधुनिकीकरण किया जाएगा ताकि शहरों की मौलिकता बनी रहे और वे आधुनिक दिखें।
- ग्रोथ हब्स का विकास: ऋषिकेश, हरिद्वार और हल्द्वानी जैसे शहरों को पर्यटन, शिक्षा और व्यापार के प्रमुख केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा।
फंडिंग और किश्तों का विवरण
परियोजनाओं के लिए धन का आवंटन प्रदर्शन के आधार पर तीन किश्तों में किया जाएगा:
- पहली किश्त: कुल बजट का 30%।
- दूसरी किश्त: कुल बजट का 50%।
- तीसरी किश्त: शेष 20%। बाकी का 50% हिस्सा निकायों को बैंक ऋण या पीपीपी (PPP) मॉडल के जरिए जुटाना होगा। आगे की किश्तें जारी करने के लिए काम की भौतिक प्रगति, जियो टैगिंग और स्वतंत्र सत्यापन (Verification) को अनिवार्य बनाया गया है।
उत्तराखंड के लिए विशेष अवसर
यह योजना वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक प्रभावी रहेगी। उत्तराखंड एक पर्वतीय राज्य है, इसलिए यहाँ के सभी 108 निकाय इस योजना के दायरे में आएंगे। इससे छोटी नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को अपनी वित्तीय स्थिति सुधारने और बड़े विकास कार्य करने का सुनहरा मौका मिलेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी निकायों को जल्द से जल्द गुणवत्तापूर्ण DPR तैयार कर केंद्र को भेजने के निर्देश दिए हैं।

