देहरादून। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के वैज्ञानिकों के एक नए अध्ययन में देश के मानसून को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। वर्ष 2001 से 2020 तक के मानसूनी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि भारत में बारिश की मात्रा ही नहीं, बल्कि बादलों के बरसने का समय भी बदल गया है। गंगा के मैदानी क्षेत्रों में जहां तेज बारिश का समय अब पहले आ रहा है, वहीं मध्य भारत में सबसे ज्यादा बारिश का समय आगे खिसक गया है।
वैज्ञानिकों ने इसरो के जीएस मैप डेटा के आधार पर जून से सितंबर के मानसूनी सीजन का गहराई से अध्ययन किया है। इसके लिए 20 वर्षों के आंकड़ों को दो दशकों में बांटकर हर घंटे होने वाली बारिश की तुलना की गई। इस रिसर्च की सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें दैनिक स्तर पर बारिश के चरम समय की सटीक मैपिंग की गई है।
विश्लेषण में सामने आया कि गंगा के मैदानी इलाकों में मानसूनी बादल दिन में अपने सामान्य समय से पहले ही बरस रहे हैं। इसके विपरीत मध्य भारत के राज्यों में बारिश का चरम समय दिन में आगे की तरफ खिसक गया है। मौसम के मिजाज में आए इस बदलाव का सीधा प्रभाव देश के कृषि चक्र और स्थानीय जल प्रबंधन पर पड़ना तय है।
अध्ययन में केवल समय ही नहीं, बल्कि बारिश की मात्रा में भी क्षेत्रीय असंतुलन दर्ज किया गया है। वर्ष 2011-20 के दौरान पश्चिम-मध्य भारत में औसतन दैनिक बारिश में पिछले दशक के मुकाबले करीब 2 मिलीमीटर प्रतिदिन की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी ओर, पूर्वी भारत के राज्यों में औसत बारिश में लगभग 1 मिलीमीटर प्रतिदिन की गिरावट दर्ज की गई है।
पूर्वोत्तर भारत में भी बारिश का यह बदलाव एक जैसा नहीं रहा है, जिससे साफ है कि मानसूनी तंत्र पूरे देश में अलग-अलग रूप में व्यवहार कर रहा है। वैज्ञानिकों ने इस बदलाव के पीछे हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों यानी ‘एरोसोल’ को मुख्य कारण माना है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2011-20 के दौरान गंगा के मैदानी क्षेत्रों के वायुमंडल में एरोसोल का स्तर काफी अधिक रहा है। ये सूक्ष्म कण बादलों के बनने और उनके भीतर होने वाली भौतिक-रासायनिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करते हैं। इसी कारण बादलों के घनत्व और उनके बरसने की समय-सारणी में अंतर आ रहा है।
इसरो के इस वैज्ञानिक अध्ययन ने स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय मानसून का परंपरागत चक्र अब बदल रहा है। हर घंटे दर्ज किए गए बारिश के इन सटीक आंकड़ों से मौसम विज्ञानियों को भविष्य में और अधिक सटीक मानसूनी पूर्वानुमान तैयार करने में मदद मिलेगी।

