उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में धारचूला के पास, चीन और नेपाल सीमा से सटे दुर्गम गांव गुंजी में भारतीय सेना ने एक सराहनीय कार्य किया है। ‘ऑपरेशन सद्भावना’ के तहत सेना ने लाखों रुपये की लागत से एक प्राथमिक विद्यालय के भवन का पुनर्निर्माण कराया है। यह स्कूल भौगोलिक कठिनाइयों और ग्रामीणों के पलायन के कारण करीब 35 वर्ष पहले बंद हो गया था। अब सेना के इस प्रयास से सीमावर्ती क्षेत्र के बच्चों को अपने ही गांव में आधुनिक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
72 लाख की लागत से आधुनिक सुविधाओं वाला विद्यालय
स्थानीय ग्रामीणों और पूर्व प्रधानों की मांग पर सेना ने ₹72 लाख की लागत से इस स्कूल को तैयार किया है। इस आधुनिक विद्यालय में 75 बच्चों के पढ़ने की क्षमता है और इसे कंप्यूटर जैसी सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। स्कूल परिसर में बच्चों के लिए तीन कक्षाएं, एक बड़ा हॉल, स्टाफ रूम और गार्ड रूम बनाए गए हैं। साथ ही बच्चों के मनोरंजन के लिए एक पार्क की सुविधा भी दी गई है, जिससे यहाँ का माहौल पढ़ाई के अनुकूल बन सके।
रिवर्स पलायन और शिक्षा को बढ़ावा
उच्च हिमालयी क्षेत्र होने के कारण वर्ष 1995 में पलायन की वजह से यह स्कूल बंद होकर धारचूला में शिफ्ट हो गया था। हालांकि, हाल के वर्षों में सीमा पर सड़कों का जाल बिछने और बुनियादी सुविधाएं बढ़ने से लोग अब वापस अपने गांव की ओर लौट रहे हैं रिवर्स पलायन। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पूर्व मुख्य सचिव नृप सिंह नपलच्याल ने शिक्षा विभाग से आग्रह किया है कि इस स्कूल को जल्द से जल्द विधिवत संचालित किया जाए ताकि बच्चों को इसका लाभ मिल सके।
सेना और ग्रामीणों के बीच मजबूत होंगे संबंध
इस स्कूल के पुनर्निर्माण का मुख्य उद्देश्य न केवल शिक्षा प्रदान करना है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात सेना और स्थानीय ग्रामीणों के बीच आपसी विश्वास और संबंधों को और अधिक मजबूत बनाना भी है। ग्राम प्रधान विमला गुंज्याल सहित पूरे गांव ने सेना के इस कदम की सराहना की है। यह स्कूल विशेष रूप से ग्रीष्मकालीन प्रवास के छह महीनों के दौरान स्थानीय बच्चों के भविष्य को संवारने में मील का पत्थर साबित होगा।

