IFS संजीव चतुर्वेदी की अनूठी पहल: 447 दिनों का बकाया भत्ता मुख्यमंत्री राहत कोष में करेंगे दान

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उत्तराखंड कैडर के वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने ईमानदारी और समाज सेवा की एक नई मिसाल पेश की है। उन्होंने अपने 447 दिनों के आधिकारिक दौरों का बकाया भत्ता, जो कि 3 लाख रुपये से अधिक है, सीधे मुख्यमंत्री राहत कोष में दान करने का निर्णय लिया है। चतुर्वेदी ने वन विभाग के प्रमुख को पत्र लिखकर स्पष्ट किया कि उन्होंने दिसंबर 2016 से अगस्त 2025 के बीच किए गए किसी भी दौरे का भत्ता अब तक नहीं लिया है और अब वे इस पूरी राशि को जनहित में समर्पित करना चाहते हैं।

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ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल

संजीव चतुर्वेदी ने अपने पत्र में 2016 से 2025 तक के दौरों का विस्तृत ब्योरा देते हुए बताया कि उन्होंने कभी अपने निजी लाभ के लिए इन भत्तों का दावा नहीं किया। अब उन्होंने अनुरोध किया है कि करीब तीन लाख रुपये की यह लंबित राशि सीधे राहत कोष में जमा कर दी जाए, ताकि इसका उपयोग राज्य के विकास और आपदा राहत कार्यों में हो सके।

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पर्यावरण और वनस्पति संरक्षण का संकल्प

भत्ता दान करने के साथ-साथ, आईएफएस अधिकारी ने राज्य में पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी अपना सुझाव साझा किया है। उन्होंने प्रदेश में 25 वनस्पति संरक्षण केंद्र स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका मुख्य उद्देश्य लुप्तप्राय पौधों की प्रजातियों को फिर से पुनर्जीवित और पुनर्स्थापित करना है, ताकि उत्तराखंड की प्राकृतिक जैव विविधता को सुरक्षित रखा जा सके।

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वन प्रभागों के लिए उच्च स्तरीय कार्य योजना

अपनी कार्यकुशलता का परिचय देते हुए संजीव चतुर्वेदी ने यह भी जानकारी दी कि उन्होंने राज्य के 28 वन डिवीजनों में से 7 के लिए उच्च गुणवत्ता वाली कार्य योजनाएं (Working Plans) सफलतापूर्वक पूरी कर ली हैं। उनकी यह पहल दर्शाती है कि एक अधिकारी प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ किस प्रकार सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकता है।