उत्तराखंड की आर्थिकी की रीढ़ मानी जाने वाली चारधाम यात्रा उफान पर है। अक्षय तृतीया के मौके पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलते ही यात्रा का शुभारंभ हो गया है। तीर्थयात्री देवभूमि में देवी-देवताओं के दर्शन के लिए लगातार पंजीकरण करा रहे हैं। ऑफलाइन हो या ऑनलाइन अब तक तकरीबन 19 लाख श्रद्धालु अपना पंजीकरण करा चुके हैं।
देवदर्शन हर भक्त का अधिकार है लिहाजा इस पर पाबंदी लगाना मुनासिब नहीं । लिहाजा भक्तों की कतार लगातार लंबी होती जा रही है। देखा जाए तो ये राज्य के लिहाज से बेहतर है। लेकिन इसके साथ ही चुनौतियां भी बढ़ जाती है। खास कर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर।
दरअसल चारधाम यात्रा का पूरा सफर पहाड़ी मार्गों से होकर गुजरता है। देवता ऊंचे पहाड़ों की चोटियों पर ही विराजमान है। लिहाजा स्वास्थ्य महकमे का दावा है कि चारधाम यात्रा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। ये दो मौतें सूबे के स्वास्थ्य महकमें के इंतजामों को सवालों के घेरे में खड़ा कर रही हैं..स्वास्थ्य विभाग ने चार धाम यात्रा के लिए रोस्टर सिस्टम पर 1350 डॉक्टर्स और पैरामैडिल कर्मचारियों का बेड़ा तैयार किया है। स्वास्थ्य महकमे का कहना है कि इसमें विशेषज्ञ डॉक्टर भी तैनात हैं जो हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, कार्डियक इमरजेंसी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज करेंगे।
चारधाम यात्रा के लिए 25 मेडिकल रिलीफ पोस्ट बनाए गए हैं । यात्रियों की फिटनेस की जांच के लिए 33 हेल्थ स्क्रीनिंग पॉइंट्स बनाने की बात भी कही गई है। आपातकालीन सेवा के तहत 177 एम्बुलेंस जिनमें सड़क पानी से लेकर आकाश तक की बात कही गई है । साथ ही हेल्पलाइन 24×7 आपातकालीन सेवाओं का दावा भी है और साथ ही साथ तीर्थयात्रियों को अपनी सेहत की जानकारी देने के लिए ई-स्वास्थ्य धाम पोर्टल के सहारा देने की बात भी कही गई है..बावजूद इसके दुखद खबर सुनने को मिलती है कि चारधाम यात्रा के पहले दिन ही दो श्रद्धालुओं की मौत हो जाती है..दोनो मौतें यमुनोत्री मार्ग पर हुई हैं..जिसमें एक महिला और एक बुजुर्ग ने अपनी जान गंवाई है।
महिला मध्यप्रदेश के इंदौर की रहने वाली थी जिसकी मौत घोड़े से गिरने की वजह से हुई। चोटिल महिला ने अस्पताल पहुंचने से पहले दम तोड़ दिया। दूसरी मौत महाराष्ट्र से तीर्थयात्रा पर आए बुजुर्ग की हुई जिन्होंने सांस लेने में दिक्कत के चलते पैदल रास्ते पर दम तोड़ दिया। इन दो मौतों ने उत्तराखंड स्वास्थ्य महकमें के इंतजामों को ऊंट के मुंह में जीरा साबित किया है। कहां तो देवदर्शन के लिए कतारों में लाखों श्रद्धालु लगे हुए हैं जबकि स्वास्थ्य महकमा सिर्फ 1350 डॉक्टर्स कांधों पर इतनी बड़ी चारधाम यात्रा का बोझ डालने पर आमादा है वो भी रोस्टर सिस्टम के तहत। मतलब साफ है कि चार धाम जैसी बड़ी तीर्थयात्रा को सूबे का स्वास्थ्य महकमा हल्के में ले रहा है।
अगर नहीं लेता तो मुट्ठी भर स्वास्थ्य कर्मियों के भरोसे चारधाम जैसी यात्रा को नहीं छोड़ा जाता। महकमे के आलाधिकारी यात्रा रूट पर तैनात स्वास्थ्य कर्मियों के दिलो-दिमाग दबाव और उनकी मनोदशा को भी समझते। एसी रूम में बैठ कर योजना बनाने और घटना स्थल पर मरीज की जान बचाने की जद्दोजहद में बड़ा फर्क होता है। शायद इस पर गौर नहीं किया गया अगर किया गया होता तो महज 130 स्वास्थ्य कर्मियों के भरोसे पर एक रूट नहीं होता।
बहरहाल पहले दिन 2 मौत की खबर से सदमा लगा है लिहाजा कहा जा सकता है कि अगर आगाज ये है तो अंजाम क्या होगा..सावधान स्वास्थ्य विभाग लगता है और होमवर्क की जरूरत है ताकि दामन पर और दाग न लगें।

