देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पार्टी के निर्देशों से इतर अपनी तय धन्यवाद जनसंवाद यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा कर चुके हैं। आज हरीश रावत अपनी इस यात्रा के सिलसिले में दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ अहम संवाद करना है।
हरदा इससे पहले ही अपनी ओर से पार्टी के सभी पदों को छोड़ने की पेशकश हाईकमान के सामने रख चुके हैं। उनके इस राजनीतिक कदम से यह साफ संकेत मिलता है कि वे पार्टी में किसी पद पर रहकर काम नहीं करना चाहते, लेकिन कांग्रेस के साथ अपनी निष्ठा बनाए रखना चाहते हैं।
पद छोड़ने से जुड़ा अपना पत्र हरीश रावत ने राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल के माध्यम से पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तक पहुंचा दिया है। तय कार्यक्रम के मुताबिक वे सबसे पहले प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा से मुलाकात करेंगे। इसके बाद पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से भी उनकी मुलाकात का समय निर्धारित हो सकता है, जिसके बाद ही उनके इस्तीफे की पेशकश पर हाईकमान कोई आधिकारिक निर्णय लेगा।
इस पूरे घटनाक्रम पर बात करते हुए हरीश रावत ने स्पष्ट किया कि उन्होंने संगठन में प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के पदों से खुद को मुक्त करने की पेशकश की है। प्रदेश प्रभारी की तीखी प्रतिक्रिया को लेकर उन्होंने कहा कि इससे कुछ अन्य नेताओं को असहजता हो सकती है, लेकिन वे दिल्ली पहुंचकर प्रभारी कुमारी सैलजा के सामने अपनी बात पूरी मजबूती से रखेंगे।
यात्रा के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यदि पार्टी आगामी चुनावों के लिए कोई संगठित कार्यक्रम तय करती है, तो वे उसमें पूरी सक्रियता से शामिल होंगे। उनकी इस व्यक्तिगत यात्रा का समय तब चुना गया था जब पार्टी का अन्य कोई आधिकारिक अभियान नहीं चल रहा था। आठ से दस चरणों की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य कांग्रेस संगठन को भीतर से झकझोरना और जनता से सीधा संवाद करना था।
अंत में हरीश रावत ने जोर देकर कहा कि प्रदेश की जनता राज्य में बदलाव चाहती है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि राजनीतिक विरोध और जनहित की सक्रियता को केवल एक-दो मुद्दों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसके दायरे को और अधिक व्यापक बनाने की जरूरत है।

