हल्द्वानी। उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की प्रस्तावित रैली से ठीक पहले भारी राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला। रैली में आ रहे कार्यकर्ताओं की गाड़ियों को रोके जाने से नाराज कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य दर्जनों कार्यकर्ताओं के साथ एसएसपी कार्यालय में दाखिल हो गए और वहीं परिसर के भीतर धरने पर बैठ गए।
कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व के अचानक इस तरह एसएसपी दफ्तर में धरने पर बैठने से पुलिस प्रशासन और जिला तंत्र में हड़कंप मच गया। दफ्तर के बाहर और भीतर भारी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता जमा हो गए और नारेबाजी शुरू कर दी।
धरने पर बैठे कांग्रेस नेताओं ने पुलिस पर सत्ताधारी दल के दबाव में काम करने का गंभीर आरोप लगाया। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि खड़गे की रैली में आ रहे निर्दोष कार्यकर्ताओं की बसों को जगह-जगह बेवजह चेकिंग के नाम पर रोका जा रहा है, जो लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।
कांग्रेस नेताओं ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि पुलिस प्रशासन निष्पक्ष व्यवस्था बनाने के बजाय सरकार के एजेंट के रूप में काम कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक कार्यकर्ताओं की गाड़ियों को बिना किसी रुकावट के आने की अनुमति नहीं दी जाती, वे एसएसपी ऑफिस से नहीं हटेंगे।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और आंदोलनकारी नेताओं से बातचीत की। स्थिति को बिगड़ता देख पुलिस अधिकारियों ने तुरंत बैकफुट पर आते हुए निर्णय लिया।
एसपी ने अधीनस्थ पुलिस बल को निर्देश जारी किए कि सभी रास्तों से बैरिकेडिंग तुरंत हटाई जाए। इसके साथ ही खड़गे की रैली में शामिल होने आ रहे कार्यकर्ताओं की बसों को बिना किसी गैर-जरूरी चेकिंग के तुरंत आगे जाने की अनुमति दी गई।
पुलिस प्रशासन की ओर से रास्ते खोले जाने और बिना रुकावट गाड़ियों को आने देने के निर्देश के बाद ही कांग्रेस नेताओं का गुस्सा शांत हुआ। अधिकारियों के लिखित-मौखिक आश्वासन के बाद गणेश गोदियाल और यशपाल आर्य ने अपना धरना समाप्त किया।
धरना खत्म होने के बाद सभी कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता रैली स्थल की ओर रवाना हो गए। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने खड़गे की रैली से ठीक पहले हल्द्वानी के राजनीतिक माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है।

