देहरादून। राजधानी देहरादून में डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच दून नगर निगम मच्छरों के खात्मे के लिए फॉगिंग का तरीका पूरी तरह बदलने जा रहा है। शहर में पारंपरिक डीजल वाली फॉगिंग की जगह अब आधुनिक ‘कोल्ड फॉगिंग’ तकनीक अपनाने की तैयारी है। इससे शहरवासियों को फॉगिंग के जहरीले धुएं से बड़ी राहत मिलेगी।
वर्तमान में नगर निगम के सभी 100 वार्डों में छोटी-बड़ी मशीनों से डीजल आधारित फॉगिंग की जाती है। इसमें प्रतिदिन औसतन 1200 लीटर डीजल की भारी खपत होती है। इसके अलावा इससे निकलने वाला धुआं पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने के साथ-साथ अस्थमा और सांस के मरीजों की तकलीफ बढ़ा देता है।
डीजल की खपत और वायु प्रदूषण से निजात दिलाने के लिए पुणे की ‘रिलायेबल पेस्ट मैनेजमेंट’ कंपनी ने नगर निगम को कोल्ड फॉगिंग का प्रस्ताव दिया है। कंपनी प्रतिनिधि मनब पॉल के मुताबिक, इस तकनीक में कीटनाशक को डीजल के बजाय पानी में मिलाकर बेहद बारीक धुंध के रूप में छिड़का जाता है। इसमें धुआं बिल्कुल नहीं निकलता।
नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडेय ने बताया कि कंपनी को अगले सप्ताह कोल्ड फॉगिंग का डेमो देने के लिए बुलाया गया है। डेमो सफल रहने पर सबसे पहले एक वार्ड में पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा। परिणाम संतोषजनक आने पर इसे पूरे देहरादून शहर में लागू करने की योजना है।
देहरादून में डेंगू का डंक: 50 के पार पहुँचे मरीज
देहरादून जिले में डेंगू का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। जिले में अब तक 50 से अधिक मरीजों में डेंगू संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है।
स्थिति से निपटने के लिए जिला अस्पताल में डेंगू मरीजों के लिए 10 बेड आरक्षित किए गए हैं, जिन्हें जरूरत पड़ने पर 40 तक बढ़ाया जा सकता है। सीएमओ डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने शुक्रवार को अस्पताल का निरीक्षण कर जरूरी निर्देश दिए।
सीएमओ ने सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को आदेश जारी कर बुखार के हर संदिग्ध मरीज की एलाइजा (ELISA) जांच अनिवार्य कर दी है। साथ ही दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने को कहा गया है। दून अस्पताल में भी 20 बेड का डेंगू वार्ड आरक्षित किया गया है।

