खाड़ी देशों में उपजे गहरे संकट की वजह से उत्तराखंड के वैश्विक व्यापार को एक बड़ा झटका लगा है, जिसके कारण राज्य के कुल निर्यात में प्रति माह 300 करोड़ रुपये की भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड द्वारा तैयार की गई एक विशेष आकलन रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी माह में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से ही खाड़ी और उसके आस-पास के क्षेत्रों से होने वाले व्यापार पर बहुत बुरा असर पड़ा है।
इस तनाव के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में मालवाहक जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो चुकी है, जिससे पूरी ट्रांसपोर्ट व्यवस्था ठप हो गई है। इसका सीधा असर उत्तराखंड में तैयार होने वाले फार्मा प्रोडक्ट्स और फूड प्रोसेसिंग उत्पादों पर पड़ रहा है, जिनकी आपूर्ति खाड़ी देशों तक नहीं हो पा रही है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने बताया कि पहले राज्य से हर महीने करीब 1500 करोड़ रुपये का निर्यात होता था, जो अब इस संकट के कारण घटकर महज 1200 करोड़ रुपये के करीब रह गया है, और इस चिंताजनक स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट जल्द ही राज्य सरकार को सौंपी जाएगी।
खाड़ी संकट ने न केवल उत्तराखंड के निर्यात बाजार को प्रभावित किया है, बल्कि वहां से आने वाले जरूरी कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला को भी पूरी तरह बाधित कर दिया है। कच्चे माल की भारी कमी होने की वजह से स्थानीय उद्योगों के लिए इसकी कीमतें आसमान छूने लगी हैं, और साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रांसपोर्ट व ईंधन के दामों में भी भारी बढ़ोतरी हो गई है।
घरेलू स्तर पर उद्योगों को एक और बड़ा झटका बिजली की दरों में हुई वृद्धि से लगा है, जिसके कारण राज्य में विभिन्न वस्तुओं का कुल उत्पादन तीन से चार फीसदी तक महंगा हो गया है। इस दोहरी मार यानी एक तरफ से महंगे उत्पादन और दूसरी तरफ से ठप पड़े निर्यात के कारण उत्तराखंड के उद्योगपतियों और कारोबारियों के सामने एक गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

