देहरादून में घरेलू सिलेंडरों की भारी किल्लत से बढ़ा बैकलॉग, कमर्शियल गैस की मांग में आई बड़ी गिरावट

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उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति बाधित होने से उपभोक्ताओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गैस एजेंसियों में वर्तमान में छह से सात दिन का बैकलॉग चल रहा है, जिसके कारण बुकिंग कराने के बाद भी लोगों को सिलेंडर मिलने में दस से बीस दिन तक का लंबा समय लग रहा है।

एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन के अध्यक्ष चमन लाल के अनुसार, पहले की तुलना में घरेलू सिलेंडरों की कुल सप्लाई में करीब 25 फीसदी तक की कमी आई है, जिससे हर गैस एजेंसी को रोजाना लगभग 150 सिलेंडर कम मिल रहे हैं और नया सिलेंडर बुक करने वाले उपभोक्ताओं को समय पर डिलीवरी नहीं हो पा रही है। दूसरी ओर, कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के चलते बड़े कमर्शियल सिलेंडरों की मांग में 10 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई है, जिसके विकल्प के रूप में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अब इंडक्शन चूल्हों और डीजल भट्टियों का उपयोग तेजी से बढ़ने लगा है।

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छोटे सिलेंडरों की डिमांड में भारी उछाल

घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की इस भीषण किल्लत और आपूर्ति संकट के बीच बाजार में पांच किलो वाले छोटे (छोटू) सिलेंडरों की मांग में पिछले एक महीने के दौरान काफी तेजी आई है। इस उछाल का एक मुख्य कारण दूसरे शहरों से आकर देहरादून में रहने वाले कामकाजी लोग और छात्र हैं, जो इसे एक अस्थायी और सुलभ कनेक्शन के तौर पर हाथों-हाथ ले रहे हैं।

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इसके अतिरिक्त, जिला पूर्ति अधिकारी कैलाश अग्रवाल के अनुसार, पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा नए गैस कनेक्शनों पर फिलहाल रोक लगाए जाने के कारण भी छोटे सिलेंडरों का प्रचलन बढ़ा है। पहले बाजार में घरेलू सिलेंडर ब्लैक में आसानी से बिना गैस बुक कराए मिल जाया करते थे, लेकिन अब ब्लैक मार्केटिंग पर कड़ाई होने के कारण लोगों के पास इन छोटे सिलेंडरों को अपनाने के अलावा कोई दूसरा आसान रास्ता नहीं बचा है।

इंडक्शन चूल्हों की रिकॉर्ड तोड़ बिक्री

रसोई गैस की लगातार बनी हुई किल्लत ने लोगों को पारंपरिक ईंधन के बजाय बिजली से चलने वाले उपकरणों की ओर रुख करने पर मजबूर कर दिया है, जिससे इस बार बाजार में इंडक्शन चूल्हों की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की गई है। इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबारी राम कपूर ने बताया कि बीते सालों में जहां आम दिनों में एक दुकान से मुश्किल से 10 इंडक्शन की बिक्री होती थी, वहीं इस संकट के दौरान एक-एक दिन में 300 इंडक्शन तक की रिकॉर्ड सेल हुई है।

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हालांकि, अचानक बढ़ी अत्यधिक मांग के कारण इन उपकरणों की कीमतों में भी तेजी देखी गई है, जिसके चलते पहले जो इंडक्शन ढाई हजार से पांच हजार रुपये के बीच मिल जाते थे, उनकी कीमतें अब बढ़कर 3500 रुपये से छह हजार रुपये तक पहुंच चुकी हैं।

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