श्रीनगर गढ़वाल में वायु प्रदूषण का तांडव: दिल्ली से ढाई गुना ज्यादा जहरीली हुई हवा, 390 पहुंचा AQI

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उत्तराखंड के जंगलों में लगी भीषण वनाग्नि और चारधाम यात्रा पर आने वाले वाहनों के अत्यधिक धुएं ने मिलकर यात्रा के मुख्य पड़ाव श्रीनगर गढ़वाल की आबोहवा को बेहद खतरनाक बना दिया है। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग द्वारा की गई हालिया मॉनिटरिंग में यह चिंताजनक तथ्य सामने आया है कि यहाँ का वायु गुणवत्ता सूचकांक पहली बार 390 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो देश की राजधानी दिल्ली के औसत प्रदूषण स्तर से भी करीब ढाई गुना अधिक है।

सामान्य दिनों में 80 से 120 के बीच रहने वाला यह सूचकांक अब लगातार 300 के पार बना हुआ है, जिसे बेहद खराब और स्वास्थ्य के लिए गंभीर रूप से हानिकारक श्रेणी में रखा जाता है। इस संकट को देखते हुए वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने पहाड़ों पर पर्यटन को सीमित करने, वाहनों की पूलिंग करने और कुछ कड़े प्रतिबंध लगाने की तत्काल सलाह दी है ताकि पर्यावरण को और अधिक नुकसान होने से बचाया जा सके।

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सिर्फ दो हफ्तों में पारा 12 डिग्री बढ़ा

श्रीनगर घाटी में मौसम के इस बदलते मिजाज के पीछे तेजी से बढ़ता तापमान और वातावरण में हानिकारक तत्वों की मौजूदगी है। छह अप्रैल से शुरू हुई वैज्ञानिक मॉनिटरिंग के दौरान देखा गया कि सात मई को यहाँ का अधिकतम तापमान जहाँ 27.19 डिग्री सेल्सियस था, वहीं वह 19 मई तक आते-आते अचानक बढ़कर 38.95 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

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इतने कम समय में लगभग 12 डिग्री सेल्सियस की यह भारी वृद्धि पहाड़ों पर मौसमी असंतुलन को खतरनाक रूप से बढ़ा रही है। इसके साथ ही, 18 से 20 मई के बीच हवा में ब्लैक कार्बन की औसत अधिकतम सांद्रता करीब 1928 नैनोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई है, जिसका मुख्य कारण जंगलों की आग, बायोमास दहन और सड़कों पर रेंगते वाहनों से निकलने वाला जहरीला धुआं है।

अप्रैल से मई के बीच तेजी से बिगड़ा प्रदूषण का ग्राफ

शोधकर्ताओं ने छह अप्रैल से 20 मई 2026 के बीच श्रीनगर गढ़वाल के मौसम, एक्यूआई और ब्लैक कार्बन स्तरों का जो वैज्ञानिक विश्लेषण किया है, उसके आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। छह से आठ मई के बीच जहां स्थिति नियंत्रण में थी और एक्यूआई 83 से 116 के बीच दर्ज किया गया था, वहीं नौ मई से प्रदूषण ने रफ्तार पकड़ी और 10 मई को यह आंकड़ा 215 तक जा पहुंचा।

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इसके बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ और 19 मई को प्रदूषण का स्तर 356 रिकॉर्ड किया गया, जिसने अगले ही दिन सुबह बढ़कर 390 का नया रिकॉर्ड स्थापित कर दिया। इस लगातार बिगड़ते ग्राफ ने साबित कर दिया है कि वनाग्नि और अनियंत्रित वाहनों का धुआं अब पहाड़ों के अस्तित्व के लिए एक बड़ा संकट बन चुका है।

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