वैश्विक बाजार में भारत को बड़ा झटका: दुनिया की टॉप-100 कंपनियों की लिस्ट से फिसले भारतीय दिग्गज

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ग्लोबल शेयर बाजार में भारतीय कॉरपोरेट जगत के लिए एक बेहद निराशाजनक खबर सामने आई है, जहाँ दुनिया की शीर्ष 100 सबसे मूल्यवान कंपनियों की सूची में अब एक भी भारतीय कंपनी अपनी जगह बचाने में कामयाब नहीं हो सकी है। ब्लूमबर्ग द्वारा जारी की गई ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और भारतीय मुद्रा पर बढ़ते दबाव के चलते घरेलू शेयर बाजार को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

इस वैश्विक उथल-पुथल के कारण विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से अपने पैर खींचने शुरू कर दिए हैं और वे लगातार बड़े पैमाने पर बिकवाली कर रहे हैं। इस चौतरफा दबाव का सीधा असर भारत की सबसे दिग्गज और मजबूत मानी जाने वाली कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन पर पड़ा है, जिसके चलते वे वैश्विक रैंकिंग में काफी पायदान नीचे खिसक गई हैं।

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शीर्ष तीन दिग्गज भारतीय कंपनियों की रैंकिंग में ऐतिहासिक गिरावट

इस वैश्विक गिरावट से पहले वर्ष 2025 की शुरुआत में भारत की तीन सबसे बड़ी कंपनियां—रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज दुनिया के इस प्रतिष्ठित क्लब का हिस्सा हुआ करती थीं। रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़ों के मुताबिक, भारत की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज जो वर्ष 2025 की शुरुआत में 57वें स्थान पर थी और 2026 की शुरुआत में 73वें पायदान पर पहुँच गई थी, वह अब और ज्यादा फिसलकर करीब 173वें स्थान पर आ गई है।

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इसी तरह देश का सबसे बड़ा निजी बैंक, एचडीएफसी बैंक भी अपनी पुरानी 97वीं रैंक से सीधे गिरकर अब 190वें पायदान पर आ चुका है। वहीं आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी टीसीएस की स्थिति सबसे ज्यादा खराब रही है, जिसकी रैंकिंग 84 से लुढ़ककर सीधे 314वें स्थान पर पहुँच गई है। इसके अलावा देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी इंफोसिस की रैंकिंग भी वर्ष 2025 की शुरुआत के 198वें स्थान से गिरकर अब 590वें स्थान पर आ गई है।

विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली

भारतीय शेयर बाजार के इस तरह दबाव में आने के पीछे कच्चे तेल की कीमतों का लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बने रहना एक मुख्य कारक माना जा रहा है। इस संकट के कारण विदेशी निवेशकों ने जनवरी से मई 2026 के बीच भारतीय शेयर बाजार से करीब 2.20 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि निकाल ली है, जिससे बाजार में नकदी और भरोसे का संकट खड़ा हो गया है।

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इसके अतिरिक्त, बाजार विश्लेषकों और आर्थिक विशेषज्ञों ने भारतीय आईटी क्षेत्र के पारंपरिक बिजनेस मॉडल को लेकर भी एक बड़ी चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन के बढ़ते अंधाधुंध इस्तेमाल के कारण भारतीय आईटी कंपनियों के पारंपरिक आउटसोर्सिंग मॉडल पर दबाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है, जिससे वैश्विक स्तर पर उनकी साख और वैल्यूएशन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

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