उत्तराखंड में सुधरेगी सड़क कनेक्टिविटी: अगले 5 साल में अपग्रेड होंगे 1291 पुल, जाम से मिलेगी मुक्ति

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उत्तराखंड में सुरक्षित और सुगम यातायात को बढ़ावा देने के लिए लोक निर्माण विभाग ने एक बड़ा कदम उठाते हुए राज्य के 1291 पुलों को अपग्रेड करने का फैसला लिया है। प्रदेश में बेहतर सड़क कनेक्टिविटी स्थापित करने के उद्देश्य से विभाग ने अगले पांच वर्षों के लिए एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।

इस बड़ी योजना के तहत चिन्हित किए गए पुलों की भार वहन क्षमता को बढ़ाया जाएगा और संकरे रास्तों को दुरुस्त करते हुए उन्हें डबल लेन में बदला जाएगा। इस बुनियादी सुधार से न केवल स्थानीय लोगों और पर्यटकों का सफर पहले से कहीं अधिक आसान होगा, बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था को भी एक नई मजबूती मिलेगी।

सिंगल लेन और कम क्षमता वाले पुलों से मिलेगी मुक्ति

वर्तमान में उत्तराखंड राज्य के भीतर 3500 से अधिक छोटे और बड़े पुल मौजूद हैं, जिनमें से 1291 पुल ऐसे हैं जो कम भार क्षमता वाले और सिंगल लेन हैं। इन संकरे पुलों के कारण यात्रा के दौरान आम जनता को अक्सर भारी ट्रैफिक जाम और गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। विभाग के इस नए फैसले के तहत अब इन सभी बाधाओं को दूर किया जाएगा।

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अगले पांच सालों के भीतर इन सभी कम क्षमता वाले सिंगल लेन पुलों को उच्चीकृत कर दिया जाएगा, जिससे राज्य के सुदूर इलाकों तक वाहनों की आवाजाही को बिना किसी रुकावट के सुनिश्चित किया जा सके।

मशीनों की आवाजाही में मिलेगी बड़ी राहत

राज्य के लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में कई प्रमुख पुलों की क्षमता बेहद सीमित होने के कारण वहां से भारी व्यावसायिक वाहनों और भारी निर्माण मशीनों को गुजारने में भारी दिक्कतें आती हैं। इसे ध्यान में रखते हुए अब

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इन पुलों को इस तरह से अपग्रेड और रिपेयर किया जा रहा है कि वे अत्यधिक भारी वजन को भी आसानी से सहन कर सकें। इस पूरी योजना को धरातल पर उतारने और इसके वित्तीय प्रबंधन के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक की ओर से विशेष वित्त पोषण की योजना बनाई गई है, जिससे काम को बिना किसी बजटीय रुकावट के समय पर पूरा किया जा सके।

असुरक्षित घोषित 91 पुलों को नए सिरे से बनाने का लक्ष्य

लोक निर्माण विभाग की ताजा सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश भर में फैले पुलों में से 91 पुलों को बेहद जर्जर और असुरक्षित की श्रेणी में डाला गया है, जो किसी भी समय बड़े हादसे का सबब बन सकते थे। विभाग के विभागाध्यक्ष राजेश शर्मा ने बताया कि इन 91 असुरक्षित पुलों को पूरी तरह से नए सिरे से तैयार करने का विशेष लक्ष्य रखा गया है।

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सरकार और विभाग का पूरा ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि समय रहते इन सभी संवेदनशील ढांचों को आधुनिक तकनीकों के सहारे नया रूप दे दिया जाए, ताकि भविष्य में होने वाली किसी भी अनहोनी को टाला जा सके और आम नागरिकों को एक सुरक्षित तथा भयमुक्त सफर की गारंटी मिल सके।

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