उत्तराखंड के किसानों को बड़ी सौगात! अब हर किसान को मिलेगा डिजिटल पहचान-पत्र

ख़बर शेयर करें

उत्तराखंड के किसानों को कृषि क्षेत्र में आधुनिकता से जोड़ने और उन्हें तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए राजस्व परिषद ने एक बड़ा कदम उठाते हुए ‘फार्मर रजिस्ट्री अभियान’ की शुरुआत कर दी है। इस अनूठी पहल के अंतर्गत अब राज्य के प्रत्येक किसान को एक विशेष डिजिटल पहचान-पत्र प्रदान किया जाएगा।

इस डिजिटल व्यवस्था को लागू करने का मुख्य उद्देश्य किसानों के सत्यापन और डेटा प्रबंधन की प्रक्रिया को पारदर्शी तथा बेहद आसान बनाना है। ग्राम स्तर से लेकर शासन के विभिन्न विभागों तक इस अभियान को सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी तय कर दी गई है, ताकि राज्य के दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले अधिक से अधिक काश्तकारों को इस डिजिटल डेटाबेस से समय रहते जोड़ा जा सके।

किसान खुद भी बना सकेंगे अपनी डिजिटल आईडी

इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसानों को अपनी डिजिटल आईडी बनवाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर नहीं होना पड़ेगा, बल्कि वे खुद भी इसे ऑनलाइन तैयार कर सकेंगे। राजस्व परिषद द्वारा जारी किए जाने वाले विशेष क्यूआर कोड को स्कैन करके किसान बेहद सरल तरीके से अपनी फार्मर आईडी बना सकते हैं, जिसके लिए उन्हें केवल अपने आधार कार्ड और भूमि संबंधी दस्तावेजों की आवश्यकता होगी।

यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड: 'सुपर चेकिंग' पर निकले CEO डॉ. पुरुषोत्तम, बूथों पर जांची फॉर्म-7 की प्रक्रिया

सुरक्षा और सत्यता की जांच के लिए पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान आधार कार्ड से लिंक मोबाइल नंबर पर ओटीपी धारित सत्यापन भी किया जाएगा, जिससे किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका न रहे। इसके अलावा जो किसान स्वयं इसे बनाने में असमर्थ हैं, वे ग्राम रोजगार सेवक, पंचायत डेटा एंट्री ऑपरेटर, साधन सचिव, बैंक सखी, कॉमन सर्विस सेंटर और जिला प्रशासन के कार्यालयों की मदद से अपनी आईडी बनवा सकते हैं।

यह भी पढ़ें -  पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर खटीमा पहुंचे CM धामी, कहा- अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचेगा विकास

बिचौलियों की भूमिका होगी पूरी तरह खत्म

राजस्व विभाग का मानना है कि इस अभियान के धरातल पर उतरने के बाद कृषि क्षेत्र और सरकारी तंत्र में मौजूद बिचौलियों और दलालों का नेटवर्क पूरी तरह से ध्वस्त हो जाएगा। फार्मर आईडी बन जाने के बाद राज्य और केंद्र सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी मध्यस्थ या कमीशनखोरी के सीधे वास्तविक किसानों तक पहुंचेगा।

इस डिजिटल पहचान-पत्र के माध्यम से पूरी प्रक्रिया इतनी पारदर्शी हो जाएगी कि भविष्य में कृषि अनुदान या किसी भी सरकारी योजना के वितरण के दौरान होने वाली वित्तीय धोखाधड़ी, कागजी हेरफेर और कागजातों की जांच में होने वाली अनावश्यक देरी की संभावना हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।

यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड की EV की रफ्तार हुई धीमी, ई-चार्जिंग की किल्लत ने 29वें पायदान पर धकेला

सब्सिडी जैसी बड़ी योजनाओं से जुड़ाव

राजस्व सचिव एसएन पांडेय के अनुसार, इस डिजिटल आईडी को भविष्य में केंद्र और राज्य सरकार की सभी प्रमुख कृषि केंद्रित योजनाओं के साथ सीधे लिंक किया जाएगा। इसके तहत प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, और खाद-बीज पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं को इस अनूठी डिजिटल आईडी से जोड़ा जा रहा है।

एक बार डेटाबेस तैयार हो जाने के बाद कृषि विभाग और सरकार के पास किसानों का सटीक ब्योरा उपलब्ध रहेगा, जिससे भविष्य में किसी भी नई सरकारी योजना को लागू करने, आपदा के समय मुआवजा बांटने और पात्रता के आधार पर सीधे लाभ ट्रांसफर करने की प्रक्रिया बेहद सुगम, तेज और सुरक्षित हो जाएगी।