उत्तराखंड के आपदा प्रभावित उत्तरकाशी जिले के धराली और हर्षिल क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं से बचाव और पूर्व चेतावनी के लिए जिला प्रशासन की ओर से एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। बीते वर्ष इन क्षेत्रों में आई भीषण आपदा की तबाही को देखते हुए, प्रशासन ने यहां आधुनिक ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’ स्थापित करने का एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर राज्य शासन को स्वीकृति के लिए भेजा है।
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के अनुसार, शासन से हरी झंडी मिलते ही इस योजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया जाएगा और प्रशासन का यह पूरा प्रयास रहेगा कि आगामी मानसून सीजन की शुरुआत से पहले ही इस अत्याधुनिक सिस्टम को धरातल पर क्रियान्वित कर दिया जाए। इस सिस्टम के सुचारू रूप से लागू होने के बाद आने वाले समय में नदियों के बढ़ते जलस्तर, अचानक आने वाली बाढ़ और आसपास की भौगोलिक तथा मौसम संबंधी गंभीर परिस्थितियों की सटीक जानकारी समय रहते मिल सकेगी, जिससे जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
छह ब्लॉकों में स्थापित होंगे स्वचालित मौसम केंद्र
प्राकृतिक आपदाओं के सटीक पूर्वानुमान और क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए जनपद के छह विकासखंडों के भीतर नौ अलग-अलग संवेदनशील स्थानों पर आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से स्वचालित मौसम केंद्र ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के सहयोग से तैयार की जा रही इस विशेष योजना के लिए उपयुक्त स्थलों का चयन भी पूरी तरह से कर लिया गया है।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष अगस्त महीने में धराली की खीर गंगा और हर्षिल के तेलगाड़ में आई अचानक आपदा के कारण कई लोग, उनके आशियाने और भवन जमींदोज हो गए थे और नदियों में एकाएक आई भारी तबाही ने स्थानीय लोगों को संभलने का न्यूनतम मौका भी नहीं दिया था। इसी को देखते हुए विषय विशेषज्ञों ने इन संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में अर्ली वार्निंग सिस्टम और मौसम केंद्रों को स्थापित करने की बेहद महत्वपूर्ण सलाह दी थी, जिसके तहत अब धराली में श्रीकंठ चोटी के निचले इलाकों और हर्षिल के अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इन अत्याधुनिक केंद्रों को स्थापित कर सुरक्षा चक्र को मजबूत किया जाएगा।

