UPCL की अधिक बिल वसूली पर नियामक आयोग सख्त, अब वापस लौटाने होंगे 1.39 करोड़ रुपये

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उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए बिजली उपभोक्ताओं के हक में एक बड़ा और राहत भरा फैसला सुनाया है। यूपीसीएल ने दिसंबर महीने में ईंधन और बिजली खरीद लागत समायोजन (FPPCA) के तहत उपभोक्ताओं से तय सीमा से अधिक कुल 60.56 करोड़ रुपये वसूल लिए थे, जबकि उसका अतिरिक्त बिजली खरीद खर्च केवल 59.17 करोड़ रुपये था।

इस प्रकार उपभोक्ताओं से करीब 1.39 करोड़ रुपये अधिक वसूल किए गए थे, जिसे अब आयोग के आदेशानुसार जून 2026 के बिजली बिलों में समायोजित कर उपभोक्ताओं को वापस लौटाया जाएगा। आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य विधि अनुराग शर्मा और सदस्य तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस अतिरिक्त राशि को अंतरिम राहत के रूप में मंजूर किया है। इसके साथ ही आयोग ने बिजली खरीद के करोड़ों रुपयों के अंतर का सटीक हिसाब न देने पर यूपीसीएल के ढुलमुल रवैये के प्रति सख्त नाराजगी जताई है और उन्हें भविष्य के लिए श्रेणीवार वसूली का स्पष्ट रिकॉर्ड बनाए रखने के कड़े निर्देश दिए हैं।

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FPPCA की जानकारी वेबसाइट पर देना हुआ अनिवार्य

बिजली उपभोक्ताओं के मासिक बजट को अचानक लगने वाले झटकों से बचाने के लिए नियामक आयोग ने यूपीसीएल को एक और महत्वपूर्ण गाइडलाइन जारी की है। उद्योग प्रतिनिधियों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों का संज्ञान लेते हुए, जिसमें कहा गया था कि महीने के बीच में अचानक एफपीपीसीए शुल्क लगाने से उपभोक्ताओं का पूरा बजट बिगड़ जाता है, आयोग ने यह अनिवार्य कर दिया है कि यूपीसीएल हर महीने की 28 तारीख तक आगामी महीने में लागू होने वाले एफपीपीसीए शुल्क की पूरी जानकारी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अनिवार्य रूप से अपलोड करे। इस नई व्यवस्था के लागू होने से राज्य के सभी बिजली उपभोक्ताओं को अपने खर्चों का पहले से सटीक आकलन करने और अपना मासिक बजट व्यवस्थित बनाने में बहुत बड़ी सहायता मिलेगी।

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17 दिन में 1 करोड़ यूनिट बढ़ी बिजली की मांग

उत्तराखंड में मौसम बदलते ही बिजली की मांग में भारी उछाल आया है, जिससे राज्य में एक बार फिर ऊर्जा संकट के आसार बनने लगे हैं। पिछले मात्र 17 दिनों के भीतर प्रदेश में बिजली की मांग एक करोड़ यूनिट बढ़ चुकी है और वर्तमान में यह आंकड़ा 5.2 करोड़ यूनिट तक पहुंच गया है। मौसम विभाग द्वारा जारी हीटवेव के पूर्वानुमान को देखते हुए माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मांग छह करोड़ यूनिट के रिकॉर्ड स्तर को भी छू सकती है, जिससे UPCL के सामने सुचारू आपूर्ति बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

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वर्तमान में मांग के मुकाबले केवल 70 प्रतिशत बिजली ही उपलब्ध हो पा रही है और बाकी की 30 प्रतिशत बिजली यूपीसीएल को मजबूरन सीधे बाजार से महंगी दरों पर खरीदनी पड़ रही है। इस बढ़ती मांग का मुख्य कारण भीषण गर्मी के साथ-साथ घरों में एसी और इंडक्शन चूल्हों के लोड में हुई अप्रत्याशित बढ़ोतरी को माना जा रहा है। हालांकि, यूपीसीएल प्रबंधन का दावा है कि राज्य में अभी कहीं भी घोषित बिजली कटौती शुरू नहीं की गई है और मांग के सापेक्ष पूरी आपूर्ति दी जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई इलाकों में लोग ट्रिपिंग की समस्या से लगातार परेशान हो रहे हैं।

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