देवप्रयाग और लंबगांव के जंगलों में भड़की भीषण आग, वन संपदा और वन्य जीवों को भारी नुकसान

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उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में जंगलों की आग का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे देवप्रयाग और लंबगांव के वन क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। देवप्रयाग नगर से बिल्कुल सटे बेली के आरक्षित वन क्षेत्र में अचानक भीषण आग लग गई, जो देखते ही देखते रातभर धधकती रही।

इस वनाग्नि के कारण जहां एक ओर राज्य की बहुमूल्य वन संपदा जलकर खाक हो गई है, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में वन्य जीवों को भी भारी नुकसान पहुंचने की खबर है। जंगलों में लगी इस भयानक आग के चलते स्थानीय तापमान में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है और पूरी नदी घाटी घने धुएं की सफेद चादर से ढक गई है, जिससे लोगों को सांस लेने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

तेज हवाओं ने बढ़ाई मुश्किल और वन विभाग का रेस्क्यू ऑपरेशन

इस प्राकृतिक आपदा से निपटने और आग पर काबू पाने के लिए वन विभाग की एक 19 सदस्यीय विशेष टीम रविवार रात से ही पूरी मुस्तैदी के साथ जुटी हुई है। डैमेज कंट्रोल की जानकारी देते हुए रेंजर एमएस रावत ने बताया कि देवप्रयाग नगर की तरफ फैल रही आग को टीम ने सूझबूझ से समय रहते नियंत्रित कर लिया है।

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हालांकि, तेज हवाओं के चलने के कारण भागीरथी तट से चोटी तक फैली यह आग तेजी से आगे बढ़ती हुई पहाड़ के दोनों तरफ देवप्रयाग-टिहरी मार्ग पर स्थित सुंदर नगर तक पहुंच गई, जिससे वन कर्मियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। वनाग्नि के कारणों पर बात करते हुए रेंजर ने बताया कि रविवार को महड़ क्षेत्र के पौखाल में ग्रामीणों द्वारा खेतों में जलाई गई आड़े की आग अनियंत्रित होकर आरक्षित वन तक पहुंच गई थी, जिसके बाद ग्रामीणों को खेतों में खरपतवार सावधानी से जलाने की सख्त हिदायत दी गई है।

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लंबगांव रेंज के संयारी और बौंसाडी तोक में भी मची तबाही

वनाग्नि का ऐसा ही एक दूसरा खौफनाक मंजर टिहरी गढ़वाल के लंबगांव रेंज में भी देखने को मिला है। यहां रविवार देर शाम संयारी और बौंसाडी तोक के जंगलों में अचानक दो अलग-अलग स्थानों पर भीषण आग भड़क उठी, जिसने देखते ही देखते कई हेक्टेयर वन क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया।

तेज हवाओं के थपेड़ों के साथ आग की लपटें इतनी भयानक और विकराल रूप ले चुकी थीं कि वन विभाग की टीम के लिए उन पर काबू पाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया था। वन विभाग की टीम ने रातभर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और सोमवार दोपहर बाद काफी कड़ी मशक्कत और संघर्ष के बाद इस क्षेत्र की आग पर नियंत्रण पाया जा सका, लेकिन तब तक बड़े पैमाने पर वन संपदा को नुकसान पहुंच चुका था।

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चारे का संकट और स्थानीय ग्रामीणों पर दोहरी मार

इस भीषण आग की वजह से स्थानीय ग्रामीणों के सामने एक नया संकट खड़ा हो गया है। बेली का यह प्रभावित जंगल आसपास के ग्रामीणों के मवेशियों के लिए घास-पत्ती जुटाने का एक मुख्य और बड़ा जरिया था, जो अब पूरी तरह जलकर नष्ट हो चुका है। इसके साथ ही, वर्तमान में गैस संकट से जूझ रहे क्षेत्र के लोग इस जंगल से अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए जलावन की लकड़ी भी जुटाते थे। जंगल के पूरी तरह स्वाहा हो जाने के कारण अब इन बेसहारा ग्रामीणों के सामने आने वाले दिनों में पशुओं के चारे और घर के ईंधन का एक बड़ा और गंभीर संकट खड़ा होने की आशंका गहरा गई है।

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