उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में रेहड़ी-पटरी और ठेली संचालकों को व्यवस्थित करने के लिए नगर निगम का महत्वाकांक्षी ‘स्मार्ट वेंडिंग जोन’ प्रोजेक्ट जमीन की भारी कमी के कारण अधर में लटक गया है। देहरादून नगर निगम प्रशासन पिछले कई सालों से शहर के भीतर नए वेंडिंग जोन शुरू करने की योजना बना रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि उन्हें कहीं भी उपयुक्त खाली सरकारी जमीन नहीं मिल पा रही है।
शहर में जहाँ भी थोड़ी-बहुत खाली जगह चिन्हित की जाती है, वहाँ स्थानीय कॉलोनीवासियों या फिर क्षेत्रीय दुकानदारों का भारी विरोध शुरू हो जाता है, जिससे निगम को कदम पीछे खींचने पड़ते हैं। इस गंभीर संकट और पार्किंग व ट्रैफिक के बढ़ते दबाव को देखते हुए अब नगर निगम ने एक नया विकल्प तलाशा है, जिसके तहत शहर के विभिन्न रेलवे ओवरब्रिज और फ्लाईओवर के नीचे खाली पड़ी जमीनों पर वेंडिंग जोन स्थापित करने की संभावनाओं को टटोला जा रहा है।
नए वेंडिंग जोन बनाने के सरकारी दावे
देहरादून नगर निगम ने चालू वर्ष की शुरुआत में शहर के अलग-अलग हिस्सों में 25 नए स्मार्ट वेंडिंग जोन बनाने का बड़ा दावा किया था। इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए निगम प्रशासन ने लोक निर्माण विभाग समेत कई अन्य सरकारी विभागों से संपर्क साधकर जमीन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी किसी भी विभाग से सकारात्मक सहयोग या जमीन नहीं मिल पाई।
वेंडिंग जोन हमेशा से दून में एक बड़ा और संवेदनशील मुद्दा रहा है क्योंकि पूर्व में जहाँ भी वेंडिंग कार्ट आवंटित किए गए, वहाँ ट्रैफिक व्यवस्था के लिए भारी बाधा खड़ी हो गई। सड़कों के किनारे आड़े-तिरछे ठेले खड़े होने से जाम की समस्या बेहद गंभीर हो गई, जिसके कारण निगम के पिछले कई प्रयास पूरी तरह असफल साबित हो चुके हैं।
6 नंबर पुलिया वेंडिंग जोन का सच
पिछले दिनों देहरादून का 6 नंबर पुलिया वेंडिंग जोन काफी चर्चा और विवादों में रहा था, जहाँ यह आरोप लगा था कि तय आवंटन से ज्यादा लोगों ने अपनी दुकानें सजा ली हैं। इस विवाद पर स्पष्टीकरण देते हुए नगर निगम प्रशासन ने साफ किया कि स्मार्ट वेंडिंग जोन में केवल 91 स्मार्ट कार्ट का ही प्रावधान था, जो पहले की तरह आज भी बरकरार है। इस बीच कुछ पुराने व्यापारियों की मृत्यु होने के बाद नियमों के अनुसार उनके परिजनों को ही कार्ट व जगह का आवंटन दोबारा किया गया है।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए मेयर सौरभ थपलियाल ने बताया कि निगम के अधिकारी और टीमें सभी वार्डों में लगातार सर्वे का काम कर रही हैं, और जैसे ही किसी भी वार्ड में कोई उचित या व्यावहारिक जगह मिलती है, वहाँ तुरंत वेंडिंग जोन के विस्तार की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
15 हजार ठेलियों के मुकाबले महज 1800 लाइसेंस
एक मोटे अनुमान के मुताबिक, देहरादून सिटी के भीतर वर्तमान में लगभग 15,000 से अधिक ठेले और रेहड़ियाँ संचालित की जा रही हैं, जिनमें से अधिकांश सड़कें और मुख्य चौराहे घेरकर खड़े होते हैं। इस भारी संख्या के विपरीत, आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार नगर निगम द्वारा केवल 1800 रेहड़ी-पटरी संचालकों को ही वैध लाइसेंस जारी किए गए हैं।
लाइसेंस धारकों और अवैध रूप से चल रही ठेलियों के बीच का यह भारी अंतर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, नगर निगम का दावा है कि जनवरी माह में मिले आंकड़ों के बाद अब इस संख्या की नए सिरे से समीक्षा की जा रही है, ताकि सभी जरूरतमंदों को व्यवस्थित करके शहर की सड़कों को पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त और जाम मुक्त बनाया जा सके।

