उत्तराखंड में मंदिरों के कायाकल्प के लिए धामी सरकार का बड़ा फैसला, सौंदर्यीकरण और सुविधाओं के लिए SOP जारी

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उत्तराखंड की धामी सरकार ने राज्य के मंदिरों के सौंदर्यीकरण और वहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाओं के विकास को लेकर नए मानक तय कर दिए हैं। पर्यटन विभाग ने इसके लिए एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है, जिसके तहत अब मंदिरों में होने वाले सभी विकास कार्य अनिवार्य रूप से स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक वास्तुकला के अनुरूप ही किए जाएंगे।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य न्यूनतम और संतुलित लागत में अधिक से अधिक मंदिरों का सुनियोजित विकास करना है, जिसके लिए हाल ही में पर्यटन सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस समान एसओपी पर अंतिम सहमति बनी थी। उप सचिव अनिल कुमार पांडे ने इस बाबत पर्यटन विकास परिषद के सीईओ, सभी जिलाधिकारियों (DM), इंजीनियरिंग विभागों और मंडलीय आयुक्तों को कड़े दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं, हालांकि इस योजना के दायरे से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से जुड़े संरक्षित मंदिरों को पूरी तरह बाहर रखा गया है।

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जिलाधिकारियों के माध्यम से भेजे जाएंगे प्रस्ताव

इस नई नीति के तहत सौंदर्यीकरण से जुड़ी सभी योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को सौंपी गई है, जिसके अनुसार जिलों से सभी विकास प्रस्ताव केवल जिलाधिकारी (DM) के माध्यम से ही शासन को भेजे जाएंगे। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संबंधित मंदिर समितियों को जमीन से जुड़े वैध दस्तावेज भी अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने होंगे। एसओपी में यह साफ किया गया है कि जिस भूमि पर विकास कार्य होना है, वह भूमि आधिकारिक रूप से मंदिर के नाम पर ही दर्ज होनी चाहिए। इसके पीछे सरकार का मुख्य मकसद यह है कि विकास और आधुनिकीकरण की इस प्रक्रिया में धर्मस्थलों की मूल पौराणिक पहचान और उनकी ऐतिहासिक विरासत पूरी तरह सुरक्षित रहे।

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न्यूनतम लागत में ज्यादा मंदिरों के विकास पर मुख्य फोकस

सरकार द्वारा जारी की गई नई एसओपी का एक प्रमुख स्तंभ यह है कि इसके अंतर्गत 11 से अधिक महत्वपूर्ण कार्यों को सौंदर्यीकरण की योजना में शामिल किया जाएगा, जिससे कम से कम खर्च में राज्य के अधिकतम धार्मिक स्थलों का कायाकल्प किया जा सके। सरकार बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए आर्थिक सहयोग के प्रस्तावों की समीक्षा कर रही है ताकि बजट का सही उपयोग हो सके। इस नीति के लागू होने से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित छोटे व ऐतिहासिक मंदिरों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकेगा, जिससे राज्य में धार्मिक पर्यटन का एक संतुलित ढांचा तैयार होगा।

सौंदर्यीकरण योजना के अंतर्गत किए जाने वाले प्रमुख कार्य

इस नई नियमावली के तहत मंदिरों के परिसर में व्यापक स्तर पर सुधार किए जाएंगे, जिसमें मुख्य रूप से मंदिर परिसर में पत्थरों से जुड़े पारंपरिक कार्य, वैज्ञानिक तरीके से रंग-रोगन और दीवारों से पुराने खराब हो चुके रंगों को हटाकर पत्थरों की वास्तविक मूल संरचना को प्रदर्शित करना शामिल है। इसके अलावा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शुद्ध पेयजल, आधुनिक शौचालय व्यवस्था, सामान्य व आकर्षक लाइटिंग और भक्तों के बैठने के लिए उचित प्रबंध किए जाएंगे। यात्रियों के मार्गदर्शन के लिए सुंदर साइन बोर्ड और सूचना पट्ट लगाए जाएंगे, साथ ही धूप और बारिश से बचाव के लिए मजबूत शेड का निर्माण, मंदिर के ऐतिहासिक प्रवेश द्वारों की मरम्मत और अन्य सभी आवश्यक सिविल कार्य भी इसी योजना के अंतर्गत पैराग्राफ के रूप में समाहित कर पूरे किए जाएंगे।

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