रुद्रनाथ यात्रा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब: रहने-खाने का भारी संकट, वन विभाग ने लागू किए सख्त नियम

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उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध रुद्रनाथ मंदिर की यात्रा पर इस बार श्रद्धालुओं की अप्रत्याशित भीड़ उमड़ पड़ी है, जिसके कारण पूरे यात्रा मार्ग पर ठहरने और भोजन की मूलभूत व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। यात्रा मार्ग के प्रमुख पड़ावों जैसे पुंग, पनार और ल्वींठी बुग्याल में कुल मिलाकर केवल 200 लोगों के ठहरने की क्षमता है, लेकिन वहां अचानक 600 से अधिक श्रद्धालु पहुंच गए हैं।

सीमित संसाधनों के बावजूद श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के अधिकारियों ने सगर गांव में यात्रियों को रोकने की कोशिश भी की, लेकिन अधिकांश श्रद्धालु आस्था के वश में होकर आगे बढ़ते रहे। इस भारी भीड़ के कारण कई यात्रियों को जगह न मिलने पर खुले आसमान के नीचे अलाव जलाकर रात काटनी पड़ी। इस अव्यवस्था से सबक लेते हुए अब वन विभाग ने यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

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यात्रा मार्ग पर सुविधाओं का भारी अभाव और बुग्यालों की स्थिति

रुद्रनाथ ट्रेक पर बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी देखी जा रही है, जिससे देश-विदेश से आने वाले यात्रियों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रविवार देर शाम तक अकेले ल्वींठी बुग्याल में ही 250 से ज्यादा श्रद्धालु पहुंच गए, जबकि वहां महज 100 लोगों के रहने-खाने का इंतजाम था।

इसी तरह पनार और पुंग बुग्याल में भी 300 से अधिक यात्री फंसे रहे, जिन्हें रहने की जगह और भोजन के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। राहत की बात केवल इतनी रही कि रात के समय मौसम साफ रहा और बारिश नहीं हुई, अन्यथा यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ सकती थीं। स्थानीय यात्रियों का भी कहना है कि सगर गांव से देर शाम तक श्रद्धालुओं के अनियंत्रित तरीके से आगे बढ़ते रहने के कारण ही यह संकट खड़ा हुआ है।

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वन विभाग द्वारा अतिरिक्त टेंटों की व्यवस्था

इस आपातकालीन स्थिति से निपटने और श्रद्धालुओं को राहत पहुंचाने के लिए केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के रेंजर भरत सिंह नेगी के नेतृत्व में वन विभाग ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया है। विभाग की ओर से व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए ल्वींठी बुग्याल में तत्काल 11 नए टेंट भेजे गए हैं, जिससे वहां लगभग 110 अतिरिक्त लोगों के ठहरने का इंतजाम हो सकेगा।

इसके अलावा, मोलीखर्क पड़ाव में तीन और पुंग बुग्याल में दो अतिरिक्त टेंट स्थापित किए जा रहे हैं। रेंजर ने बताया कि रविवार को 370 और सोमवार को 250 श्रद्धालु रुद्रनाथ की ओर रवाना हुए थे और अब विभाग सीमित संसाधनों के भीतर ही इन सभी को सुरक्षित आवास देने की हरसंभव कोशिश कर रहा है।

सुरक्षा के मद्देनजर नए नियमों की घोषणा

भविष्य में ऐसी अव्यवस्था और किसी भी संभावित खतरे को रोकने के लिए वन विभाग ने अब यात्रा के लिए सख्त नियम लागू कर दिए हैं। नए नियमों के मुताबिक, रुद्रनाथ मंदिर के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को अब दोपहर दो बजे से पहले हर हाल में प्रवेश द्वार सगर गांव पहुंचना होगा।

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अपराह्न दो बजे के बाद किसी भी यात्री को रुद्रनाथ ट्रेक पर आगे जाने की अनुमति बिल्कुल नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही, पड़ावों पर रहने व खाने की सीमित क्षमता को देखते हुए अब प्रतिदिन केवल 200 श्रद्धालुओं को ही आगे भेजने का कोटा तय किया गया है। प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि किसी भी श्रद्धालु ने तय समय सीमा के बाद जबरन ट्रेक पर जाने का प्रयास किया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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