बंगाल में इमामों और पुजारियों का भत्ता समाप्त, सुवेंदु सरकार ने TMC के फैसलों को बदला

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पश्चिम बंगाल की नवनिर्वाचित सरकार ने एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक कदम उठाते हुए राज्य में धर्म के आधार पर चलाई जा रही सभी सहायता योजनाओं को पूरी तरह बंद करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में सोमवार को आयोजित हुई दूसरी कैबिनेट बैठक में यह अहम फैसला लिया गया, जिसके तहत पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार द्वारा इमामों, मुअज्जिनों और पुजारियों को दिया जाने वाला मासिक वित्तीय भत्ता आगामी एक जून से पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कदम किसी भेदभाव के तहत नहीं, बल्कि राज्य में प्रशासनिक सुधारों को लागू करने और सभी वर्गों के लिए समान कल्याणकारी योजनाएं सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

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नए प्रशासनिक सुधार और लोक-कल्याणकारी योजनाएं

इस महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक में वित्तीय भत्तों को बंद करने के साथ-साथ आम जनता के हित में कई नई कल्याणकारी योजनाओं की भी घोषणा की गई है। सरकार ने राज्य में कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है और आगामी एक जून से महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा देने का भी बड़ा फैसला किया है।

इसके अतिरिक्त, राज्य के युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से सरकारी नौकरियों में भर्ती के लिए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा में पांच साल की बड़ी छूट देने का प्रावधान किया गया है, जिससे अब अधिक संख्या में अभ्यर्थी परीक्षाओं में शामिल हो सकेंगे।

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वहीं अदालती आदेशों के अनुपालन और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए सुवेंदु सरकार ने राज्य की मौजूदा अन्य पिछड़ा वर्ग सूची में व्यापक संशोधन करने का भी निर्णय लिया है। यह कदम कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा साल 2024 में दिए गए एक पुराने फैसले के अनुरूप उठाया जा रहा है, जिसके तहत पूर्व में शामिल की गई कुछ जातियों की पात्रता की समीक्षा की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा करने और ओबीसी वर्गों की एक नई, सटीक सूची तैयार करने के लिए सरकार द्वारा जल्द ही एक विशेष विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाएगा।

महिला सुरक्षा की जांच के लिए विशेष आयोगों का गठन

पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए कथित घोटालों और कानून व्यवस्था की स्थिति की जांच के लिए नई सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। कैबिनेट ने केंद्र और राज्य की विभिन्न विकास योजनाओं में हुए भ्रष्टाचार की गहराई से जांच करने के लिए एक विशेष जांच आयोग का गठन किया है, जो गड़बड़ियों का पता लगाकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की सिफारिश करेगा। इसके साथ ही, राज्य में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हुए अपराधों की त्वरित जांच के लिए एक अन्य उच्च स्तरीय आयोग बनाया गया है, जिसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त जस्टिस शम्पति चट्टोपाध्याय करेंगी और इसमें वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी दमयंती सेन को भी एक बेहद अहम और बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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