NEET UG Paper Leak Case: नीट पेपर लीक मामले में लातूर से कोचिंग सेंटर का संस्थापक गिरफ्तार

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नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा के पेपर लीक मामले में देश की प्रमुख जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को एक बहुत बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र के लातूर स्थित ‘रेनुकाई कैरियर कोचिंग सेंटर’ के संस्थापक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को गिरफ्तार कर लिया है।

जांच एजेंसी द्वारा विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता की अदालत में पेश किए जाने के बाद आरोपी शिवराज को नौ दिनों की सीबीआई हिरासत में भेज दिया गया है। जांच अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी को 3 मई को आयोजित हुई मुख्य परीक्षा से ठीक 10 दिन पहले ही पूरा प्रश्नपत्र और उसके सही उत्तर मिल चुके थे, जिसकी मदद से उसने इस पूरी परीक्षा प्रणाली में बड़ी सेंध लगाई थी।

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छापेमारी, मोबाइल साक्ष्य और एनटीए कर्मचारियों के साथ साठगांठ

सीबीआई की टीम ने पुख्ता जानकारी के आधार पर रविवार दोपहर लातूर के शिवनगर में स्थित संबंधित कोचिंग सेंटर पर अचानक छापा मारा था, जिसके बाद आरोपी के आवास पर शुक्रवार को लगभग आठ घंटे तक सघन पूछताछ की गई और आखिरकार रविवार शाम को उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।

एजेंसी को छापेमारी के दौरान आरोपी शिवराज के मोबाइल फोन से लीक हुए प्रश्नपत्र की डिजिटल तस्वीरें भी बरामद हुई हैं, जिन्हें अब पूरी गहराई से जांचने और डिलीट किए गए डेटा को वापस पाने के लिए फोन को फोरेंसिक लैब भेजा जा रहा है। सीबीआई के गिरफ्तारी मेमो के मुताबिक, शिवराज राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से जुड़े उन सरकारी कर्मचारियों और लोक सेवकों के संपर्क में था जो परीक्षा कराने की मुख्य जिम्मेदारी संभाल रहे थे और उन्हीं के साथ मिलकर इस पूरी आपराधिक साजिश को अंजाम दिया गया।

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पेपर लीक का संगठित नेटवर्क और सबूत मिटाने की कोशिश

जांच एजेंसी की शुरुआती पूछताछ और पड़ताल में यह तथ्य सामने आया है कि आरोपी शिवराज इस पूरे पेपर लीक और उसके अवैध प्रसार से जुड़े एक बहुत बड़े संगठित गिरोह में सक्रिय रूप से शामिल था। वह इस रैकेट के मुख्य मास्टरमाइंड पीवी कुलकर्णी के साथ सीधे संपर्क में था और दोनों मिलकर इस नेटवर्क को चला रहे थे।

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शिवराज ने लीक हुए प्रश्नपत्रों और उत्तरों की प्रतियों को सीधे देने के बजाय कई अभ्यर्थियों और लोगों को हाथ से लिखे हुए नोट्स के रूप में उपलब्ध कराया था ताकि किसी को शक न हो। इसके साथ ही, पकड़े जाने के डर से और किसी भी तरह के पुख्ता सबूत को पीछे न छोड़ने की नीयत से परीक्षा संपन्न होने के ठीक बाद इन सभी हस्तलिखित नोट्स को पूरी तरह से जलाकर नष्ट कर दिया गया था।

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