उत्तराखंड के चमोली जिले में विश्व प्रसिद्ध नंदादेवी राजजात यात्रा मार्ग को अधिक सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए बद्रीनाथ वन प्रभाग ने एक बड़ी और महत्वपूर्ण योजना पर काम शुरू कर दिया है. इस विशेष परियोजना के तहत लगभग 48 किलोमीटर लंबे चार प्रमुख पैदल ट्रैक रूटों की मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का कार्य एक करोड़ रुपये की भारी बजट लागत से बेहद जल्द शुरू होने जा रहा है।
वन प्रभाग के इस ऐतिहासिक कदम से न केवल हर बारह साल में आयोजित होने वाली पौराणिक नंदादेवी राजजात यात्रा में आने वाले देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं को अभूतपूर्व सुविधा मिलेगी, बल्कि हर साल इन दुर्गम चोटियों पर आने वाले हजारों साहसिक ट्रैकर्स और स्थानीय निवासियों का सफर भी काफी आसान हो जाएगा. ट्रैक्स के सुधरने से स्थानीय पर्यटन व्यवसाय को एक नई ऊर्जा मिलेगी और पूरी घाटी में पर्यटकों की सुरक्षा व्यवस्था पहले से कई गुना मजबूत हो जाएगी.
वान से गैरोली पातल और पातर नचौनिया ट्रैक रूटों का होगा पूर्ण कायाकल्प
विशेषज्ञों और वन अधिकारियों के अनुसार, इस मरम्मत अभियान के तहत मुख्य रूप से उन दुर्गम रास्तों को सुधारा जा रहा है जो रूपकुंड और बेदनी बुग्याल जैसे संवेदनशील और अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों की ओर जाते हैं. इस योजना के अंतर्गत पूर्वी पिंडर रेंज (देवाल) में स्थित वान से गैरोली पातल तक के 10 किलोमीटर लंबे कठिन मार्ग को दुरुस्त करने के लिए 23.11 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।
इसके साथ ही, इसी बेहद खूबसूरत रेंज में गैरोली पातल से होते हुए पातर नचौनिया तक जाने वाले 12 किलोमीटर लंबे ट्रैक की मरम्मत पर 34.40 लाख रुपये की राशि व्यय की जाएगी, ताकि अधिक ऊंचाई पर चढ़ने वाले राहगीरों को किसी तरह के हादसों का सामना न करना पड़े.
नंदप्रयाग और थराली रेंज के सबसे लंबे रास्तों को तीन महीने में सुधारने का लक्ष्य
परियोजना के दूसरे हिस्से में वन प्रभाग ने सबसे लंबे और सबसे दुर्गम पैदल पथों के जीर्णोद्धार का खाका तैयार किया है, जिसे आगामी तीन महीनों के भीतर अनिवार्य रूप से पूरा करने का कड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसके तहत नंदप्रयाग रेंज में आने वाले सुतोल से चन्दनियाघाट तक के सबसे लंबे 18 किलोमीटर के ट्रैक रूट के सुधार कार्य पर सर्वाधिक 50.57 लाख रुपये की भारी धनराशि खर्च की जाएगी।
इसके अतिरिक्त, मध्य पिंडर रेंज के अंतर्गत डूंग्री से सूना गांव तक जाने वाले 8 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग की मरम्मत के लिए भी 13.57 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं. वन अधिकारियों का मानना है कि इन चारों ट्रैकों की स्थिति सुधरने से न केवल लोकजात और राजजात यात्रा के श्रद्धालुओं को सहूलियत होगी, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों को अपने पशुओं के लिए ऊंचाई वाले चारागाहों और बुग्यालों तक सुरक्षित पहुंचने में भी बड़ी राहत मिलेगी।

