उत्तराखंड में CNG ग्राहकों से खुली लूट: शहर बदलते ही बदल रहे दाम, दिल्ली-यूपी से ₹20 तक महंगी हुई गैस

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उत्तराखंड में ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच गैस कंपनियों की मनमानी आम जनता की जेब पर भारी पड़ रही है, जिसके कारण राज्य के सीएनजी ग्राहक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। प्रदेश में वर्तमान में लगभग 1 लाख सीएनजी वाहन रजिस्टर्ड हैं, लेकिन कंपनियों ने अपने हिसाब से अलग-अलग शहरों में मनमाने रेट तय कर रखे हैं।

राजधानी देहरादून में सीएनजी की कीमत ₹94.50 प्रति किलो है, जबकि देहरादून से हरिद्वार पहुंचते ही यह ₹5.50 रुपये तक महंगी हो जाती है। हरिद्वार और ऋषिकेश में इसकी दरें ₹96.91 से लेकर ₹100 प्रति किलो तक हैं, वहीं रुड़की में यह ₹99 प्रति किलो और कुमाऊं के हल्द्वानी, रुद्रपुर जैसे इलाकों में भी यह ₹100 प्रति किलो तक बिक रही है।

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इस असमानता पर खाद्य विभाग के अपर आयुक्त पीएस पांगती का कहना है कि कंपनियों के रेट फिक्स होते हैं, इसलिए इस बड़े अंतर को लेकर विभाग संबंधित कंपनियों से जल्द वार्ता करेगा।

उत्तराखंड में सीएनजी की भारी कीमतें

उत्तराखंड में दूसरे राज्यों की तुलना में सीएनजी 10 से 20 फीसदी तक महंगी बिक रही है, जिससे दिल्ली जैसे शहरों के मुकाबले यहाँ के उपभोक्ताओं को प्रति किलो ₹20 तक अधिक चुकाने पड़ रहे हैं। दिल्ली में वर्तमान में सीएनजी की कीमत ₹80.09 प्रति किलो है और उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद व नोएडा में यह ₹88.70 रुपये प्रति किलो मिल रही है, जबकि उत्तराखंड में यह आंकड़ा ₹94.50 से ₹100 प्रति किलो तक पहुंच चुका है।

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कीमतों में इस भारी अंतर के कारण स्थानीय वाहन चालकों के साथ-साथ वीकेंड, पर्यटन सीजन और यात्रा के दौरान बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों को भी भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है, जिससे वाहनों का किराया और माल भाड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है।

तेल कंपनियों द्वारा ज्यादा रेट वसूलने का खेल

हैरानी की बात यह है कि उत्तराखंड में सीएनजी पर महज 5 फीसदी वैट लागू है, जबकि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में यह टैक्स 12 फीसदी तक है और दिल्ली में सरकार सीएनजी पर किसी भी प्रकार का वैट नहीं लेती है। इसके बावजूद उत्तराखंड में सीएनजी की कीमतें यूपी से कहीं ज्यादा कम होने के बजाय बहुत अधिक हैं, जिसके कारण तेल कंपनियों के दावों के मुताबिक देश में सबसे ज्यादा कीमतों वाले राज्यों में उत्तराखंड भी शामिल हो गया है।

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कंपनियों ने पहाड़ी राज्य का हवाला देकर कीमतें बढ़ाई हैं, लेकिन असलियत यह है कि सीएनजी की पाइपलाइन फिलहाल सिर्फ मैदानी क्षेत्रों तक ही सीमित है और पहाड़ों में इसकी सप्लाई न के बराबर है; वहीं दूसरी ओर पड़ोसी पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश के शिमला और सोलन जैसे पहाड़ी शहरों तक सीएनजी पहुंचने के बावजूद वहां की कीमतें उत्तराखंड के मैदानी इलाकों के लगभग बराबर ही हैं।

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