उत्तराखंड के शिक्षा विभाग में तबादला सत्र को लेकर स्थिति स्पष्ट न होने के कारण इन दिनों शिक्षा निदेशालय में शिक्षकों और कर्मचारियों की भारी भीड़ उमड़ रही है। इसी बीच शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने सख्त और दो टूक रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि विभाग में अब किसी भी सूरत में मनमर्जी का अटैचमेंट नहीं किया जाएगा।
निदेशालय पहुंचे कई शिक्षकों को फटकार लगाते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई छोटी-मोटी बीमारी या स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो नियमानुसार मेडिकल छुट्टी लेकर अपना उपचार कराएं, लेकिन बीमारी का बहाना बनाकर सुगम क्षेत्रों या अपनी पसंद की जगहों पर अटैचमेंट कराने की कोशिश बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शिक्षा निदेशक ने स्पष्ट किया है कि शासन स्तर से नए निर्देश जारी होने के बाद ही तबादला प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
अटैचमेंट की सिफारिशों पर लगी कड़ी फटकार
निदेशालय में चकराता, चमोली, बागेश्वर, दून और उत्तरकाशी जैसे विभिन्न दुर्गम क्षेत्रों से आए कई शिक्षकों ने देहरादून और अन्य सुगम स्थानों पर अटैचमेंट तथा तबादले के लिए पैरवी शुरू कर दी थी, जिस पर शिक्षा निदेशक ने गहरी नाराजगी जताई है।
कुमाऊं क्षेत्र से आए एक शिक्षक ने हाथ में फ्रैक्चर का हवाला देकर देहरादून तबादले की मांग रखी, तो निदेशक ने साफ शब्दों में कहा कि इस तरह की चोट का इलाज स्थानीय स्तर पर भी पूरी तरह संभव है। उन्होंने अधिकारियों और शिक्षकों को सचेत करते हुए कहा कि मनमाने अटैचमेंट के कारण मूल तैनाती वाले ग्रामीण और पर्वतीय स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित होती है, इसलिए शिक्षकों को अपनी सहूलियत से पहले छात्रों के भविष्य और उनके हित के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए।
अंतिम तबादला आदेश का इंतजार
शिक्षा महकमे में अनुरोध के आधार पर होने वाले तबादलों को लेकर मुख्य सचिव समिति पहले ही अपनी हरी झंडी दे चुकी है, लेकिन अनिवार्य तबादलों पर फिलहाल पूरी तरह पाबंदी लागू है। समिति की बैठक में जो भी महत्वपूर्ण फैसले लिए गए थे, उन पर शासन स्तर से औपचारिक और अंतिम आदेश जारी होना अभी बाकी है।
मुख्य सचिव के छुट्टी पर होने के कारण इस पूरी प्रक्रिया में थोड़ा विलंब हुआ है, लेकिन प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार उम्मीद जताई जा रही है कि आगामी 23 मई तक विभाग की ओर से इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए जाएंगे, जिससे शिक्षकों के असमंजस की स्थिति समाप्त हो सकेगी।

