देहरादून में बिना पंजीकरण चल रहे 3 निजी अस्पताल सील, पारस समेत 3 को नोटिस

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देहरादून में मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले और नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले निजी अस्पतालों व क्लीनिकों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। मीडिया द्वारा निजी अस्पतालों की मनमानी का मुद्दा प्रमुखता से उठाए जाने के बाद हरकत में आए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शहर के छह निजी अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया।

इस छापेमारी के दौरान गंभीर अनियमितताएं और भारी खामियां पाए जाने पर बिना पंजीकरण के अवैध रूप से संचालित हो रहे तीन अस्पतालों को मौके पर ही तत्काल प्रभाव से बंद करवा दिया गया। इसके साथ ही, विभाग ने तीन अन्य पंजीकृत अस्पतालों में डॉक्टरों की गैर-मौजूदगी और लापरवाही मिलने पर उन्हें कड़ा नोटिस थमाया है। स्वास्थ्य विभाग की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से पूरे चिकित्सा क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।

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ना पंजीकरण-ना फायर NOC

स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट के अनुसार, सुभाष नगर स्थित डॉ. रेनू बिष्ट विनायक हेल्थकेयर, जोगीवाला स्थित पाइल्स केयर हॉस्पिटल आयुष वेलनेस सेंटर और कारगी बंजारावाला रोड स्थित दून मेडिसिटी हॉस्पिटल क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत बिना किसी वैध पंजीकरण के चलाए जा रहे थे। इतना ही नहीं, दून मेडिसिटी हॉस्पिटल के पास अनिवार्य फायर एनओसी भी मौजूद नहीं थी, जिसके कारण इन तीनों अवैध अस्पतालों को तुरंत सील कर दिया गया।

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वहीं दूसरी ओर, रिस्पना पुल के पास स्थित करीब 50 बेड वाले पारस हॉस्पिटल ट्रॉमा एंड मॉर्फस में निरीक्षण के समय एक मरीज तो भर्ती मिला, लेकिन वहां कोई भी डॉक्टर ड्यूटी पर तैनात नहीं था। हैरानी की बात यह भी रही कि मौके पर मिले दो पुरुष स्टाफ नर्स भी उत्तराखंड पैरा चिकित्सा परिषद में पंजीकृत नहीं पाए गए, जो मरीजों की सुरक्षा के साथ सीधे तौर पर खिलवाड़ है।

अस्पतालों की घोर अव्यवस्था

निरीक्षण के दौरान शिमला बाईपास स्थित हयात मेडिकल सेंटर और रिंग रोड स्थित एमएस हॉस्पिटल में भी व्यवस्थाएं भगवान भरोसे पाई गईं। 15 से 20 बेड वाले एमएस हॉस्पिटल के पास पंजीकरण तो था, लेकिन वहां के प्रभारी चिकित्सक मौके से नदारद मिले।

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मरीजों को बिना डॉक्टरों के बेसहारा छोड़कर गायब रहने की इस घोर लापरवाही पर स्वास्थ्य विभाग ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। सीएमओ डॉ. मनोज शर्मा के निर्देश पर पारस, हयात और एमएस हॉस्पिटल के प्रबंधकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन कार्य दिवस के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है। विभाग ने साफ कर दिया है कि मरीजों के स्वास्थ्य के साथ इस तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यह जांच अभियान लगातार जारी रहेगा।

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