देहरादून। उत्तराखंड में अफसरशाही के गलियारों में इन दिनों तबादलों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। शासन स्तर पर बड़े प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और माना जा रहा है कि कभी भी तबादला सूची जारी हो सकती है। खास बात यह है कि कई जिलों के जिलाधिकारियों के साथ-साथ शासन में तैनात वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की जिम्मेदारियों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
सूत्रों के मुताबिक 29 मई से शुरू होने वाले एसआईआर कार्यक्रम से पहले शासन इस तबादला सूची को जारी करना चाहता है, ताकि नई जिम्मेदारियों के साथ अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में व्यवस्था को बेहतर तरीके से संभाल सकें। यही वजह है कि पिछले कुछ दिनों से शासन स्तर पर अधिकारियों की कार्यशैली, प्रदर्शन और प्रशासनिक पकड़ को लेकर लगातार मंथन चल रहा है।
वहीं केंद्र सरकार से आईएएस अधिकारी सचिन कुर्वे को चेन्नई पोर्ट के लिए मंजूरी मिलने के बाद उत्तराखंड के स्वास्थ्य विभाग में भी बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है। सचिन कुर्वे के जाने से स्वास्थ्य सचिव का महत्वपूर्ण पद खाली होने जा रहा है, जिसे लेकर शासन में कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के नाम चर्चा में हैं। स्वास्थ्य विभाग की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ऐसे अधिकारी की तलाश में है जो प्रशासनिक अनुभव के साथ विभागीय चुनौतियों को भी बेहतर ढंग से संभाल सके।
इसके अलावा कई जिलों में जिलाधिकारियों के बदलाव की कवायद भी लगभग पूरी मानी जा रही है। कुछ जिलों में लंबे समय से जमे अधिकारियों को नई जिम्मेदारी दी जा सकती है, जबकि कुछ जिलों में सरकार नए चेहरे उतारकर प्रशासनिक गति बढ़ाने के मूड में दिखाई दे रही है। चर्चा यह भी है कि जिन अधिकारियों ने योजनाओं के क्रियान्वयन और कानून व्यवस्था में बेहतर प्रदर्शन किया है, उन्हें शासन में अहम जिम्मेदारियां मिल सकती हैं।
शासन के गलियारों में इन दिनों अधिकारियों की “कुंडली” खंगालने का काम भी तेज है। सरकार हर स्तर पर ऐसे अधिकारियों को आगे लाने की तैयारी में है जिनकी छवि परिणाम देने वाले अफसरों की रही है। माना जा रहा है कि इस फेरबदल का असर सिर्फ जिलों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि सचिवालय स्तर पर भी कई विभागों में नई तैनातियां देखने को मिल सकती हैं।
फिलहाल सभी की निगाहें संभावित तबादला सूची पर टिकी हैं। सचिवालय से लेकर जिलों तक अफसरशाही में हलचल तेज है और अधिकारी भी अपनी नई तैनाती को लेकर अंदरखाने जोड़-तोड़ में जुटे बताए जा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार प्रशासनिक सर्जरी में किन चेहरों पर भरोसा जताती है और किन अधिकारियों की कुर्सी बदलती है।

