अनुकंपा नियुक्ति के लिए नया फॉर्मूला: शादी लायक बेटियां और नाबालिग बच्चे होने पर नौकरी के प्रबल आसार

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केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय ने अनुकंपा के आधार पर दी जाने वाली सरकारी नौकरियों के लिए एक नया और पारदर्शी अंक आधारित फॉर्मूला तैयार किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य सबसे अधिक जरूरतमंद आवेदकों को प्राथमिकता देना है। दरअसल, अनुकंपा के तहत भरे जाने वाले पदों की संख्या बेहद सीमित होती है जबकि आवेदकों की संख्या काफी अधिक होती है, जैसे वर्तमान में महज 6 उपलब्ध पदों के लिए मंत्रालय के पास 50 आवेदन आए हैं।

इसी चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने एक वेटेज-आधारित अंक प्रणाली बनाई है, जिसके तहत यदि किसी आवेदक के परिवार में शादी के योग्य बेटियां हैं या बच्चे नाबालिग हैं, तो उन्हें अतिरिक्त अंक मिलेंगे और उनके नौकरी पाने की संभावना काफी बढ़ जाएगी। सही और सबसे योग्य उम्मीदवार की सिफारिश करने के लिए संयुक्त सचिव और विधि सलाहकार की अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन किया गया है, जो आवेदकों की पात्रता की गहन जांच करेगी।

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दो श्रेणियों में विभाजन और अंकों का विशेष निर्धारण फॉर्मूला

इस नई व्यवस्था के तहत आवेदनों को मुख्य रूप से दो अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जिसमें पहली श्रेणी में उन मामलों को रखा गया है जहाँ सरकारी कर्मचारी का निधन 31 दिसंबर 2015 को या उससे पहले हुआ था, जबकि दूसरी श्रेणी में 01 जनवरी 2016 को या उसके बाद दिवंगत हुए कर्मचारियों के आश्रितों के आवेदनों को शामिल किया गया है।

नए नियमों के मुताबिक, दोनों ही श्रेणियों में यदि आवेदक के पास शादी के योग्य 3 या उससे अधिक बेटियां हैं तो उन्हें विशेष तौर पर 15 अंक दिए जाएंगे, और ठीक इसी तरह 3 या उससे अधिक नाबालिग बच्चे होने की स्थिति में भी 15 अंक मिलने का प्रावधान किया गया है।

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इसके विपरीत, जिन आवेदकों के पास अपना खुद का मकान है उन्हें इस फॉर्मूले में शून्य अंक मिलेगा जिससे उन्हें थोड़ी निराशा हो सकती है, जबकि जिनकी फैमिली पेंशन जितनी कम होगी, उन्हें उतने ही अधिक अंक देकर वरीयता दी जाएगी ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को संबल मिल सके।

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: वारिस को बाहर रखने मात्र से वसीयत अवैध नहीं

इसी खबर के साथ कानूनी मोर्चे से जुड़ा एक अन्य महत्वपूर्ण फैसला भी सामने आया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए साफ किया है कि केवल स्वाभाविक उत्तराधिकारियों को वसीयत से बाहर रखने मात्र से किसी वसीयत को अवैध या फर्जी नहीं माना जा सकता। शीर्ष अदालत की पीठ ने दिवंगत बी. शीना नैरी की पत्नी और बच्चों द्वारा दायर उस अपील को पूरी तरह से खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने वसीयत की वैधता को चुनौती दी थी।

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गौरतलब है कि दिवंगत नैरी ने अपनी वसीयत के माध्यम से कर्नाटक में स्थित अपनी संपत्तियों का मालिकाना हक अपने परिवार के बजाय अपनी बहन लक्ष्मी नैरी को सौंप दिया था, जिसे अब माननीय अदालत ने कानूनी रूप से पूरी तरह सही ठहराया है।

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