उत्तराखंड में पहाड़ पलायन की पीड़ा भोग रहा है तो मैदानी इलाके बेहिसाब आबादी का दबाव। जिसके कई साइड इफैक्ट हुए । इन्ही में से एक है पशुपालन का व्यवसाय। राज्य बनने के बाद सूबे के हालात क्या हैं उसको आपने सौरभ मैठाणी के गीत में जरूर सुना होगा कि, “तख कुकुर घुमौंदा ,यख गौड़ी भैंसी पिजौंदा” लेकिन उम्मीद है कि अब ये तस्वीर जरूर बदलेगी।
उसकी वजह है कि राज्य के काबिल पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा की पहल। बहुगुणा की पहल के बाद अब उत्तराखंड की कामधेनु मानी जाने वाली बद्री और दूसरी पहाड़ी नस्ल की गायों का गुणकारी घी टाटा कंज्यूमर्स खरीदेगा। इसके लिए उत्तराखंड के दुग्ध ब्रांड और टाटा कंज्यूमर्स प्राइवेट लिमिटेड के बीच एमओयू हुआ है।
सबकुछ ठीक रहा तो जल्द ही टाटा कंज्यूमर्स उत्तराखंड की पहाड़ी गायों के दूध से तैयार घी को भारत ही नहीं दुनिया भर तक मशहूर कर देगा। इससे उत्तराखंड के दुग्ध ब्रांड “आंचल” का परचम दुग्ध बाजार में लहराएगा वहीं उत्तराखंडी उत्पादों की शुद्धता की पहचान का भी डंका बचेगा।
बहरहाल देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम मे उत्तराखंड दुग्ध उत्पादक संघ और टाटा कंज्यूमर्स के बीच सहमति बन गई है। कार्यक्रम में उत्तराखंड के दुग्ध विकास एवं पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा और समाज कल्याण मंत्री खजान दास समेत आंचल और टाटा कंज्यूमर्स के अधिकारी मौजूद रहे।
इतना तय है कि इस करार के बाद राज्य के मैदानी इलाके हों या पहाड़ी इलाके सब जगह पशुपालन का क्रेज बढ़ जाएगा। उम्मीद है कि फिर से राज्य के पहाड़ी गांव मैदानी गांवो की तरह पशधन से भरपूर दिखें। हर घर में गाय भैंस बंधी दिखें और आंचल के जरिए टाटा का घी वाला पेमेंट किसान के बैंक खाते में जाता दिखे।
वैसे देखा जाए तो इस कदम के लिए सूबे की सरकार के साथ साथ राज्य के पशुपालन मंत्री भी तारीफ के हकदार हैं। समाचार 4U को उम्मीद है कि नतीजे बेहतर आंएगे और राज्य के पशुपालक वैरीगुड वर्क, थैंक्यू सरकार कहेंगे।
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