कोटद्वार: GMOU में ₹3.85 करोड़ से अधिक का घोटाला, फर्जी दस्तावेजों और मृतकों के नाम पर करोड़ों का गबन

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कोटद्वार। उत्तराखंड के कोटद्वार में गढ़वाल मोटर ऑनर्स यूनियन लिमिटेड में वित्तीय वर्ष 2022-23 के दौरान 1.81 करोड़ रुपये का एक और बड़ा वित्तीय घोटाला पकड़ में आया है। जीएमओयू के संयुक्त सचिव नितिन रावत ने पुलिस उपाधीक्षक को आधिकारिक शिकायत देकर कथित गबन की जांच करने, आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई है। यह नया घोटाला मार्च 2025 में सामने आए पहले वाले घोटाले की तर्ज पर ही अंजाम दिया गया है।

कंपनी प्रबंधन की ओर से कराई गई आंतरिक जांच के बाद अब कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस उपाधीक्षक को औपचारिक तहरीर सौंप दी गई है। इससे ठीक एक दिन पहले ही सीओ की जांच के आधार पर जीएमओयू की जमीन को खुर्दबुर्द किए जाने के मामले में कोतवाली पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है। संयुक्त सचिव नितिन रावत की शिकायत के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2022-23 से लेकर 2024-25 के बीच कंपनी के खजाने से भारी हेरफेर की गई है।

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शिकायत में बताया गया है कि जीएमओयू मुख्यालय कोटद्वार में फर्जी प्रार्थना पत्र और वाउचर तैयार करके कंपनी के खातों से करीब 1.81 करोड़ रुपये अवैध रूप से निकाले गए हैं। कंपनी की जांच समिति की 17 सितंबर 2026 की रिपोर्ट और विशेष मुख्य लेखा अधिकारी की 6 अक्तूबर 2026 की रिपोर्ट में इन वित्तीय अनियमितताओं का आधिकारिक तौर पर खुलासा हुआ है। आरोप है कि इस खेल में कंपनी के कुछ चुनिंदा पदाधिकारियों, अधिकारियों और कर्मचारियों की गहरी मिलीभगत रही है।

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जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जी नामों और मृत वाहन स्वामियों के दस्तावेजों के सहारे काल्पनिक खर्च दिखाकर भुगतानों को दर्शाया गया था। इस पूरे प्रकरण में पूर्व चेयरमैन, तत्कालीन महाप्रबंधक, तत्कालीन सहायक लेखाधिकारी, तत्कालीन लेखा लिपिक, तत्कालीन कैशियर और तत्कालीन स्टेशन इंचार्ज की संलिप्तता पाई गई है। शुरुआती वित्तीय वर्ष 2022-23 में 1.81 करोड़ की अनियमितता के अलावा, 2023-24 और 2024-25 के दौरान कुल 3.85 करोड़ रुपये का गबन किए जाने का अंदेशा जताया गया है।

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वाहन स्वामियों के एडवांस, डीजल फंड, दान, रिपेयरिंग, वेतन और ट्रैफिक अरेंजमेंट के नाम पर 1.25 करोड़ रुपये से अधिक के भुगतानों में बड़े पैमाने पर धांधली की गई है। मुख्यालय के कैशियर अनुभाग से उन लोगों के नाम पर रकम निकाली गई जो या तो इस दुनिया में नहीं थे या फिर उन स्थानों पर कभी तैनात ही नहीं रहे थे। पुलिस ने इन गंभीर शिकायतों के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।