उत्तराखंड सरकार राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बड़े सुधार करने की तैयारी में है। सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (ITDA) ने ई-कचरे के वैज्ञानिक निपटान, AI के सुरक्षित उपयोग और विभागों के बीच डेटा साझा करने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए तीन महत्वपूर्ण नीतियों का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। सचिव आईटी नितेश कुमार झा के अनुसार, ये तीनों नीतियां शासन स्तर पर अपने अंतिम चरण में हैं और जल्द ही इन्हें मंजूरी के लिए कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। इन नीतियों के लागू होने से न केवल सरकारी कामकाज की गति बढ़ेगी, बल्कि आम जनता के डेटा की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित हो सकेगा।
ई-कचरा निपटान नीति
राज्य में पहली बार ई-कचरे के प्रबंधन के लिए एक ठोस नीति बनाई जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य खराब मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का सुरक्षित निपटान करना है। इस नीति में खराब हार्ड डिस्क में मौजूद डेटा की प्राइवेसी और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाएगा। साथ ही, इसमें ‘बाय बैक’ का प्रावधान भी होगा, जिसके तहत पुरानी डिवाइस वापस करने पर नई खरीदारी में छूट मिल सकेगी। इससे होने वाली आय सरकारी कोष में जमा की जाएगी।
प्रदेश की पहली एआई नीति
उत्तराखंड अपनी पहली एआई नीति लाने जा रहा है, जिसका लक्ष्य सरकारी विभागों के कामकाज को अधिक तेज और प्रभावी बनाना है। इस नीति के तहत भविष्य में स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य महत्वपूर्ण विभागों में एआई तकनीक के इस्तेमाल का एक खाका तैयार किया गया है। इससे सेवाओं की निगरानी करना और योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करना आसान हो जाएगा।
डेटा गवर्नेंस पॉलिसी
वर्तमान में विभिन्न सरकारी विभागों के पास उपलब्ध डेटा को आपस में साझा करने के लिए कोई निश्चित प्रक्रिया नहीं है। नई डेटा गवर्नेंस नीति आने के बाद विभागों के बीच डेटा का आदान-प्रदान सुगम हो जाएगा। इससे बाहरी कंपनियों की मदद से डेटा का विश्लेषण करना, नई योजनाएं बनाना और उनकी सटीक निगरानी करना सरल हो जाएगा, जिससे शासन में पारदर्शिता और कुशलता आएगी।

