दून मेडिकल कॉलेज में नई पहल: अब मरीज के खुद के खून से होगा इलाज

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देहरादून स्थित दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों के लिए एक अत्याधुनिक उपचार पद्धति ‘पीआरपी’ (प्लेटलेट्स रिच प्लाज्मा) थेरेपी की शुरुआत की गई है। दंत रोग विभाग में सफल ट्रायल के बाद अब इस थेरेपी का उपयोग जबड़े के गठिया और अन्य जटिल समस्याओं के इलाज के लिए किया जा रहा है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें मरीज के अपने ही शरीर से लिए गए खून का उपयोग किया जाता है, जिससे घाव तेजी से भरते हैं, हड्डियां मजबूत होती हैं और दर्द में बड़ी राहत मिलती है। अस्पताल के विशेषज्ञों का मानना है कि यह पारंपरिक उपचार के मुकाबले कहीं अधिक प्रभावी और सुरक्षित विकल्प है।

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कैसे काम करती है पीआरपी थेरेपी?

ब्लड बैंक की चिकित्सक डॉ. सना उमर के अनुसार, इस प्रक्रिया में मरीज के शरीर से करीब 20 से 50 एमएल खून निकाला जाता है। फिर एक विशेष मशीन के जरिए इसे बहुत तेज रफ्तार में घुमाया जाता है, जिससे लाल रक्त कोशिकाएं अलग हो जाती हैं और प्लेटलेट्स वाला हिस्सा गाढ़ा होकर ऊपर आ जाता है। इस तैयार प्लाज्मा में सामान्य खून के मुकाबले 5 से 10 गुना ज्यादा ‘ग्रोथ फैक्टर्स’ होते हैं, जिसे बाद में इंजेक्शन के जरिए प्रभावित हिस्से में दिया जाता है।

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दंत रोगों और पुरानी चोटों में रामबाण इलाज

दंत रोग विभाग के एचओडी डॉ. अमित शाह ने बताया कि एक 18 वर्षीय युवक, जिसके जबड़े में गठिया के कारण मुंह खुलना बंद हो गया था, उसे पीआरपी थेरेपी दी गई और अब उसका मुंह आसानी से खुलने लगा है। यह थेरेपी जबड़े की हड्डी गलने, मसूड़ों के जख्म, दांत निकालने के बाद घाव भरने और ट्यूमर व रसौली के उपचार में नई जान फूंकने का काम करती है।

न्यूरो, ऑर्थो और स्किन के मरीजों को भी मिलेगा लाभ

यह थेरेपी केवल दांतों तक सीमित नहीं है। न्यूरो सर्जन डॉ. डीपी तिवारी इसे न्यूरो सर्जरी के मरीजों को दे रहे हैं। इसके अलावा, यह घुटनों के दर्द, घिसे हुए कार्टिलेज को ठीक करने, पुरानी लिगामेंट इंजरी और हड्डी टूटने के मामलों में भी बेहद कारगर साबित हो रही है। ऑर्थो और स्किन विभाग ने इस थेरेपी की बढ़ती सफलता को देखते हुए अपने विभागों में भी मशीनें लगाने की मांग की है, ताकि त्वचा संबंधी समस्याओं और बाल झड़ने का इलाज भी इसके जरिए बेहतर ढंग से किया जा सके।

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