देहरादून। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों के पहनावे को लेकर सख्त कदम उठाया गया है। अस्पताल के कैंसर रोग विभाग के विभागाध्यक्ष ने ड्यूटी के दौरान जींस-टीशर्ट पहनने पर रोक लगाते हुए सभी डॉक्टरों और कर्मचारियों के लिए फॉर्मल ड्रेस कोड का कड़ाई से पालन करने के निर्देश जारी किए हैं।
विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि कुछ डॉक्टर और कर्मचारी जींस-टीशर्ट पहनकर ड्यूटी पर आ रहे हैं, जो अस्पताल की मर्यादा और कार्यालय के तय मानकों के खिलाफ है। आदेश के तहत अब सभी चिकित्सकों और स्टाफ को ड्यूटी के दौरान केवल फॉर्मल कपड़े ही पहनने होंगे।
नए निर्देशों के अनुसार फॉर्मल कपड़ों के साथ डॉक्टरों के लिए एप्रन पहनना और गले या सीने पर पहचान पत्र लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। विभागाध्यक्ष ने साफ चेतावनी दी है कि ड्रेस कोड के नियमों की अनदेखी करने वाले डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
अस्पताल प्रशासन ने कर्मचारियों की बायोमेट्रिक उपस्थिति पर भी सख्ती बढ़ा दी है। इस संबंध में डीएमएस डॉ. विनम्र मित्तल ने बताया कि प्राचार्य और एमएस स्तर से पहले भी ड्रेस कोड, एप्रन और आईकार्ड को लेकर लगातार निर्देश जारी किए जाते रहे हैं और अब इनका शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित कराया जा रहा है।
डीएमएस डॉ. विनम्र मित्तल के अनुसार, अस्पताल में अनुशासित माहौल और डॉक्टरों की पेशेवर गरिमा बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि ड्यूटी के दौरान फॉर्मल कपड़ों के साथ आईकार्ड लगाना अनिवार्य है ताकि मरीजों और तीमारदारों को डॉक्टरों की पहचान करने में सहूलियत हो सके।
दूसरी ओर, ड्यूटी के दौरान जींस-टीशर्ट पर बैन को लेकर डॉक्टरों के बीच दो अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। कुछ डॉक्टरों का कहना है कि फॉर्मल ड्रेस से ही डॉक्टर की पेशेवर पहचान बनी रहती है, इसलिए अस्पताल परिसर में इस मर्यादा का पालन होना बेहद जरूरी है।
वहीं, कुछ अन्य चिकित्सकों का मानना है कि यदि साधारण टी-शर्ट के ऊपर डॉक्टर ने सफेद एप्रन पहना हुआ है, तो उस पर रोक नहीं होनी चाहिए। हालांकि, सभी डॉक्टरों ने इस बात पर सहमति जताई कि तड़क-भड़क और भड़कीले कपड़ों से ड्यूटी के दौरान परहेज किया जाना चाहिए।
दून मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा जारी इस कड़े रुख के बाद अब अस्पताल के सभी विभागों में ड्रेस कोड, आईकार्ड और बायोमेट्रिक हाजिरी की निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि व्यवस्था में सुधार लाया जा सके।

