दून अस्पताल में बदहाली: इमरजेंसी से OPD भेजे जाने पर महिला मरीज बेहोश, 9 घंटे टला अल्ट्रासा

ख़बर शेयर करें

देहरादून। दून अस्पताल में अव्यवस्थाओं के कारण मरीजों की जान पर बन आई है। सोमवार को अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती एक मरीज का अल्ट्रासाउंड कराने में करीब नौ घंटे का समय लग गया। वहीं एक अन्य महिला मरीज को इमरजेंसी से जांच के लिए ओपीडी भेजने के दौरान वह बिल काउंटर के पास बेहोश होकर गिर पड़ी, जिससे परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा।

सहसपुर से परिजनों के साथ पेट दर्द के इलाज के लिए सुबह 6 बजे आए 40 वर्षीय मरीज सोनू को डॉक्टरों ने अल्ट्रासाउंड की सलाह दी थी। आईपीडी में कर्मचारियों ने कोटा पूरा होने की बात कहकर मना कर दिया, जिसके बाद उन्हें ओपीडी भेजा गया और दोपहर 3:30 बजे का समय दिया गया। इस दौरान मरीज को ले जाने के लिए वार्ड बॉय तक नहीं मिला और परिजन खुद ही व्हीलचेयर खींचने को मजबूर हुए।

यह भी पढ़ें -  पानी तेरी अजब कहानी, कहीं तेरे लिए तरसते हैं कहीं तू खुद के लिए तरसता है!

इसी तरह इमरजेंसी में भर्ती एक अन्य महिला मरीज को दोबारा जांच के लिए ओपीडी भेज दिया गया। परिजन जब फार्मेसी के पास लाइन में लगकर बिल कटा रहे थे, तभी महिला अचानक बेहोश हो गई। बदहवास परिजन उसे ऑटो में लादकर दोबारा इमरजेंसी पहुंचे और डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया।

यह भी पढ़ें -  हरिद्वार में महिला कांस्टेबल से छेड़छाड़, होमगार्ड जवान के खिलाफ FIR दर्ज

तीमारदारों का सीधा आरोप है कि इमरजेंसी से गंभीर मरीजों को जानबूझकर ओपीडी के चक्कर कटवाए जाते हैं। डॉक्टरों और स्टाफ की इस मनमानी से व्यवस्थाएं पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं। अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, अस्पताल के ही एक वरिष्ठ डॉक्टर का संरक्षण मिलने के कारण लापरवाह कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है।

यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड में 3 दिन बाद थमा बारिश का दौर, आज राहत के आसार, 5 जिलों में अलर्ट जारी

मामले पर दून अस्पताल के एमएस डॉ. आरएस बिष्ट का कहना है कि मरीजों की भारी भीड़ के कारण समय में देरी हुई है। उन्होंने माना कि मरीजों को जांच के लिए ओपीडी भेजना पूरी तरह गलत है और मरीज के साथ वार्ड बॉय क्यों नहीं भेजा गया, इसकी जांच कराई जा रही है। दोषी डॉक्टरों व कर्मचारियों पर जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।