देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के छावनी परिषद क्षेत्र स्थित एक स्कूल में शिक्षिका द्वारा प्रधानाध्यापक पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पीड़ित शिक्षिका ने मामले की शिकायत छावनी परिषद प्रशासन से की है, जिसके बाद हड़कंप मच गया है। प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे मामले की आधिकारिक जांच शुरू कर दी गई है, जिससे संबंधित संस्थान और अधिकारियों में अफरा-तफरी का माहौल है।
छावनी परिषद ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक आंतरिक समिति का गठन किया है। यह समिति पूरे प्रकरण की बारीकी से जांच करेगी और 30 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट मुख्य अधिशासी अधिकारी को सौंपेगी। समिति को नियमों के अनुसार निष्पक्ष जांच करने और दोनों पक्षों को अपना-अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर देने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच प्रक्रिया के तहत गठित समिति को मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों, साक्ष्यों और रिकॉर्ड्स का गहन परीक्षण करना होगा। छावनी परिषद की ओर से आंतरिक शिकायत समिति का पुनर्गठन हाल ही में 10 सितंबर को किया गया था, जो कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम के लिए जिम्मेदार है। इस समिति की अध्यक्षता कार्यालय अधीक्षक कर रहे हैं, जो पूरी जांच प्रक्रिया का नेतृत्व करेंगे।
दूसरी तरफ, देहरादून जिले के जौलीग्रांट स्थित अठूरवाला में संचालित एक उपखनिज भंडारण स्थल पर अनियमितता का मामला सामने आया है। शिकायतों के आधार पर सहायक खनिज पर्यवेक्षक पंकज चंद ने भंडारण स्थल का औचक निरीक्षण किया, जहां कमियां पाए जाने पर संचालक पर 48,200 रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।
सहायक खनिज पर्यवेक्षक पंकज चंद ने स्पष्ट किया कि नियमों के उल्लंघन पर यह दंडात्मक कार्रवाई की गई है और क्षेत्र में अवैध उपखनिज भंडारण के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। जिला प्रशासन ने एक ओर जहां स्कूल मामले में निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है, वहीं दूसरी ओर व्यावसायिक अनियमितताओं पर भी सख्त रुख अपनाया है।

