देहरादून। देहरादून पुलिस ने नीट यूजी 2025 में फर्जी दस्तावेजों के जरिए एमबीबीएस में दाखिला दिलाने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल ने प्रेस वार्ता कर पूरे मामले का खुलासा करते हुए दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार करने की जानकारी दी। रायपुर और क्लेमेंटाउन थाने में दर्ज मुकदमों के बाद हुई इस कार्रवाई से मेडिकल एजुकेशन क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने जब अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की गहन जांच की और संबंधित मेडिकल कॉलेजों से डेटा जुटाया, तो भारी अनियमितताएं सामने आईं। एसआईटी को जांच में फर्जीवाड़े के पुख्ता सबूत मिले, जिसके आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को दबोच लिया।
पुलिस पड़ताल में सामने आया कि पकड़ा गया मुख्य आरोपी रूपेश पंडित मेरठ से एजुकेशन कंसल्टेंसी का नेटवर्क चला रहा था। वह मेरठ स्थित एक संस्था के माध्यम से देश के विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों और विदेशों में मेडिकल सहित अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में एडमिशन कराने का काला कारोबार कर रहा था।
एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल के अनुसार, इस गिरोह ने एमबीबीएस की आरक्षित सीटों पर दाखिला पक्का कराने के लिए फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र तैयार करवाए थे। इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के बूते अयोग्य अभ्यर्थियों को गलत तरीके से मेडिकल कॉलेजों में एंट्री दिलाई जा रही थी।
देहरादून पुलिस ने छापेमारी के दौरान आरोपियों के कब्जे से फर्जी दस्तावेज और कई संदिग्ध कागजात बरामद कर जब्त कर लिए हैं। पुलिस अब इस जांच में जुटी है कि इस फर्जीवाड़े के जाल के जरिए अब तक कितने अभ्यर्थियों को मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिलाया जा चुका है और इसमें कौन-कौन से दलाल शामिल हैं।
एसएसपी ने साफ किया कि पूरे प्रकरण की बेहद गंभीरता और निष्पक्षता से पड़ताल की जा रही है। पुलिस टीम इस नेटवर्क से जुड़े अन्य मददगारों, कंसल्टेंट्स और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। अधिकारियों का दावा है कि इस मामले में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

