देहरादून। उत्तराखंड सरकार अब सुपरफूड के रूप में मशहूर मखाने की खेती के जरिए राज्य के किसानों की किस्मत बदलने की तैयारी में है। उद्यान विभाग के मुताबिक, प्रदेश में आगामी नवंबर महीने से ‘मखाना मिशन’ का आधिकारिक आगाज होने जा रहा है। पहले चरण में राज्य के 21 हेक्टेयर क्षेत्र में मखाने की खेती का लक्ष्य रखा गया है, जिसका सीधा फायदा मैदानी और तराई क्षेत्रों के किसानों को मिलेगा।
उद्यान विभाग के अपर निदेशक डॉ. रतन कुमार ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए हरिद्वार और उधम सिंह नगर (यूएसनगर) जिलों को मुख्य रूप से चुना गया है। इसके अलावा नैनीताल, देहरादून के मैदानी इलाकों और पौड़ी जिले के कोटद्वार में भी मखाने की खेती कराई जाएगी। किसानों को मखाना उत्पादन की आधुनिक तकनीकों से रूबरू कराने के लिए बिहार भेजकर विशेष प्रशिक्षण भी दिलाया गया है।
मखाना मिशन को सफल बनाने के लिए सरकार किसानों को नए तालाब बनाने से लेकर प्रोसेसिंग यूनिट लगाने तक पर 40 से 50 प्रतिशत तक की भारी सब्सिडी दे रही है। उद्यान विभाग के अनुसार, नया तालाब बनाने में प्रति हेक्टेयर 1.79 लाख रुपये और पुराने तालाब के जीर्णोद्धार में 1.32 लाख रुपये की लागत आती है, जिस पर व्यक्तिगत किसानों को 40 फीसदी सब्सिडी मिलेगी।
उत्पाद की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग के लिए भी सरकार ने मदद का खाका तैयार किया है। व्यक्तिगत रूप से 10 लाख रुपये की लागत वाली माइक्रो यूनिट या 39 लाख रुपये की स्मॉल यूनिट लगाने पर किसानों को 35 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी। वहीं, यदि किसान समूह बनाकर ये यूनिट स्थापित करते हैं, तो उन्हें 50 फीसदी तक की बंपर सब्सिडी मिलेगी।
केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद उत्तराखंड ने पारंपरिक खेती से हटकर मखाने जैसी नकदी फसल को बढ़ावा देने के लिए यह बड़ा कदम उठाया है। वर्तमान में मखाना उत्पादन में बिहार देश का नंबर वन राज्य है, इसी वजह से उत्तराखंड के किसानों को बिहार के अनुभवी किसानों से गुर सिखाए गए हैं।
बाजार में प्रचुर पौष्टिक गुणों वाले इस सुपरफूड की मांग काफी अधिक है और खुले बाजार में मखाना 1,000 रुपये प्रति किलोग्राम या उससे भी अधिक कीमत पर बिकता है। ऐसे में जलभराव वाले मैदानी क्षेत्रों का सही इस्तेमाल कर मखाने की खेती शुरू कराना, राज्य के किसानों की आय में भारी बढ़ोतरी का जरिया बन सकता है।

