देहरादून। राजधानी देहरादून में डेंगू और मलेरिया का प्रकोप रोकने के लिए नगर निगम प्रशासन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। शहर के सभी 100 वार्डों में फॉगिंग और एंटी-लार्वा रसायनों का छिड़काव किया जा रहा है। दून की 15 लाख से अधिक आबादी को बीमारियों से बचाने के लिए नगर निगम रोजाना ₹3.14 लाख से ज्यादा की राशि धुएं और दवा में खर्च कर रहा है।
मानसून के दौरान बारिश का पानी जगह-जगह जमा होने से मच्छरों का खतरा बढ़ गया है। इससे निपटने के लिए निगम ने 100 छोटी मशीनों और 4 बड़ी मशीनों को मैदान में उतारा है। इसके अलावा जमा पानी में मच्छर के लार्वा को पनपने से रोकने के लिए 20 विशेष टैंकरों के जरिए एंटी-लार्वा रसायन का छिड़काव कराया जा रहा है।
रोजाना ₹1.14 लाख का लग रहा पेट्रोल-डीजल
फॉगिंग मशीनों को चलाने के लिए प्रतिदिन भारी मात्रा में ईंधन की खपत हो रही है। हर वार्ड की छोटी मशीन को रोजाना 10 लीटर डीजल मिलता है अर्थात कुल 1,000 लीटर डीजल पर प्रतिदिन लगभग ₹95,000 खर्च हो रहे हैं। वहीं मशीनों के संचालन के लिए रोज 200 लीटर पेट्रोल की जरूरत पड़ती है, जिस पर लगभग ₹19,000 की लागत आ रही है।
इसके इतर, मच्छरों और उनके लार्वा को खत्म करने के लिए रोजाना रसायनों पर भी मोटा बजट खर्च किया जा रहा है। फॉगिंग के दौरान 1,200 लीटर डीजल में लगभग 24 लीटर दवा मिलाई जाती है, जिसकी दैनिक कीमत ₹15,000 से अधिक है। जबकि 20 टैंकरों के जरिए रोजाना दो राउंड में 200 लीटर एंटी-लार्वा दवा का छिड़काव हो रहा है। इसकी रोजाना की कीमत ₹1.50 लाख से ज्यादा बैठती है।
रिस्पना-बिंदाल किनारे की मलीन बस्तियों पर खास नजर
देहरादून में अप्रैल से सितंबर के बीच डेंगू और मलेरिया के मामले सबसे ज्यादा दर्ज किए जाते हैं। खासतौर पर रिस्पना और बिंदाल नदी के किनारों पर बसी घनी मलिन बस्तियां इसके लिए बेहद संवेदनशील मानी जाती हैं। इसी खतरे को देखते हुए निगम की टीमें इन इलाकों में बार-बार छिड़काव कर रही हैं।
मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आनंद कुमार शुक्ला ने पुष्टि करते हुए बताया कि नगर निगम की टीमें हर वार्ड में नियमित फॉगिंग कर रही हैं। संवेदनशील इलाकों और जलभराव वाले स्थानों पर टैंकरों से एंटी-लार्वा छिड़काव कराया जा रहा है ताकि संक्रमण को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके।

