Dehradun: महिला डॉक्टर का दहेज उत्पीड़न, रोजा-साड़ी पर ताने, 30 लाख मांगने पर FIR दर्ज

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देहरादून। देहरादून के पटेलनगर थाना क्षेत्र में एक उच्च शिक्षित एमबीबीएस और एमएस महिला डॉक्टर ने अपने पति और ससुराल पक्ष के पांच लोगों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने पति समेत पांचों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस को दी गई तहरीर के अनुसार, पीड़िता की मुलाकात अगस्त 2023 में एक मुस्लिम मैट्रिमनी ऐप के जरिए पंजाब निवासी एक व्यक्ति से हुई थी। आरोपी ने खुद को गैर-शराबी और ब्रिटेन में कार्यरत ऑर्थोपेडिक डॉक्टर बताया था। दोनों परिवारों की सहमति से देहरादून में उनका निकाह संपन्न हुआ। निकाह से पहले ससुराल वालों ने महिला डॉक्टर को अपनी प्रैक्टिस जारी रखने की सहमति दी थी।

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महिला डॉक्टर का आरोप है कि रिसेप्शन के दौरान पति और उसके साथियों द्वारा शराब पीने से उन्हें पहला धक्का लगा। इसके बाद ससुराल वालों ने उनके सभी जेवर अपने पास रख लिए। शादी के तुरंत बाद पति, सास, ससुर, देवर और ननद मिलकर उन पर नौकरी छोड़ने का दबाव बनाने लगे। इतना ही नहीं, देवर द्वारा उनके कद, रंग और वजन को लेकर लगातार अपमानजनक टिप्पणियां की जाने लगीं।

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शिकायत के मुताबिक, रमजान के दौरान रोजा रखने और खाने-पीने को लेकर भी पीड़िता को ताने दिए जाते थे। ससुराल पक्ष के लोग कहते थे कि यूपी के मुसलमान बहुत खाते हैं। इसके अलावा जब भी वह साड़ी पहनती थीं, तो पति और सास उनके धर्म और पहनावे को लेकर तंज कसते थे, जिससे पीड़िता की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और वह गंभीर मानसिक तनाव में रहने लगीं।

पीड़िता ने आरोप लगाया कि ससुराल पक्ष द्वारा लगातार 30 लाख रुपये दहेज की मांग की जा रही थी। पति जब भी उन्हें मायके लेकर आता, उनके माता-पिता से रुपयों की मांग करता और उनकी कमियां गिनाता था। लुधियाना के एक अस्पताल में नौकरी शुरू करने के बाद भी पति ने फोन पर गाली-गलौज कर उन्हें नौकरी छोड़ने पर मजबूर कर दिया।

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लगातार प्रताड़ना और पति द्वारा जान से मारने की धमकियों से तंग आकर डॉक्टर ने लुधियाना की नौकरी छोड़ दी और अपनी बहन के साथ देहरादून मायके लौट आईं। पीड़िता ने अपनी व परिजनों की सुरक्षा की गुहार लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। पटेलनगर थाना प्रभारी विनोद गुसाईं ने बताया कि शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है।