Dehradun: मासूमों को 2 लाख में बेचने वाले 4 दोषियों को 10-10 साल की कैद

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देहरादून। दून की अदालत ने कैंट क्षेत्र की यमुना कॉलोनी से दो नाबालिग मासूमों को चुराकर दो लाख रुपये में अवैध रूप से गोद देने के गंभीर मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश मदन राम की अदालत ने बाल तस्करी के आरोप में प्रियंका, सेंटी, तान्या और राकेश को 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही चारों दोषियों पर सात-सात हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

मामला 16 दिसंबर 2024 का है, जब कैंट थाना क्षेत्र स्थित यमुना कॉलोनी निवासी रीना के पांच वर्षीय बेटे आकाश और दो वर्षीय बेटे विकास को घर से बहला-फुसलाकर अगवा कर लिया गया था। इस मामले में पीड़िता की तहरीर पर 2 जनवरी 2025 को कैंट थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच के दौरान पुलिस ने सबसे पहले आरोपी राकेश और तान्या को मुरादाबाद से गिरफ्तार किया।

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पूछताछ में मिले सुरागों के आधार पर देहरादून पुलिस टीम बिजनौर के धामपुर में प्रियंका और सेंटी के ठिकाने पर पहुंची। जांच में पता चला कि चुराए गए दो वर्षीय बालक विकास को बिजनौर निवासी राजरानी को सौंपा गया था। राजरानी ने पुलिस को बताया कि उसने प्रियंका और सेंटी को 2 लाख रुपये देकर बच्चे को लिया था। पुलिस ने बच्चे को सकुशल बरामद कर उसकी मां के सुपुर्द किया।

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अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल आठ गवाहों के बयान दर्ज कराए। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि बच्चों को उनके माता-पिता से अलग कर उनका व्यावसायिक दुरुपयोग करना बेहद गंभीर अपराध है, जो मानवता के खिलाफ है। अदालत ने मामले के एक अन्य आरोपी राहुल को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।

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बचाव पक्ष ने सजा पर सुनवाई के दौरान आरोपियों की पारिवारिक जिम्मेदारियों का हवाला देकर कम सजा की मांग की, जबकि अभियोजन ने सख्त से सख्त सजा देने की पैरवी की। अदालत ने कहा कि दोषियों का कोई पुराना आपराधिक इतिहास नहीं है और बच्चा सुरक्षित मिल गया है, ऐसे में न्यूनतम 10 वर्ष की सजा कानून के मकसद को पूरा करती है। फैसले के बाद चारों दोषियों को देहरादून जेल भेज दिया गया।

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