देहरादून: चूना भट्टा में वक्फ संपत्तियों पर लगे लाल निशान, 40 साल पुराने कब्जों पर अब चलेगा कानूनी चाबुक

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देहरादून। देहरादून के चूना भट्टा इलाके में वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को अवैध कब्जे से मुक्त कराने की प्रशासनिक कार्रवाई कानूनी दांव-पेच में उलझ गई है। 12 सितंबर को 18 संपत्तियों पर लाल निशान लगाए जाने के बावजूद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। प्रशासन सीधे वक्फ संपत्तियों को खाली नहीं करा सकता, जिसके चलते अब वक्फ बोर्ड को धारा-54 के तहत विधिक प्रक्रिया शुरू करनी पड़ रही है।

प्रशासनिक नियमों के अनुसार, वक्फ बोर्ड को धारा-54 लागू कर औपचारिक नोटिस जारी करने और सुनवाई पूरी करने का कानूनी अधिकार है। हालांकि, पीडब्ल्यूडी की सड़क की जद में आने वाली जमीन को सीधे कब्जा मुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन स्वतंत्र है और वहां सीधी कार्रवाई की जा सकती है।

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इस मामले में वक्फ बोर्ड अब करीब 250 अवैध कब्जाधारकों को दोबारा धारा-54 के तहत नोटिस भेजने की बड़े पैमाने पर तैयारी कर रहा है। सीईओ की अध्यक्षता में सभी पक्षों की सुनवाई की जाएगी। इसके बाद मामला वक्फ ट्रिब्यूनल के समक्ष भेजा जाएगा, जहां से आदेश मिलने के बाद ही ध्वस्तीकरण या बेदखली की अंतिम कार्रवाई होगी

दूसरी तरफ, वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी मुतवल्लियों को निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने लंबे समय से किराया न देने वाले और अवैध कब्जा जमाए बैठे लोगों को तत्काल नोटिस देने और जिला प्रशासन से पत्राचार कर अतिक्रमण हटाने को कहा है

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मामले में मुतवल्ली गुलफाम शेख ने बताया कि चूना भट्टा में कई लोगों का पिछले 40 से 50 वर्षों से वक्फ संपत्तियों पर कब्जा है। इनमें से कुछ कब्जाधारकों ने तो दुकानों और मकानों को 20 हजार से 40 हजार रुपये प्रति माह के किराये पर दूसरों को चढ़ा रखा है

हालांकि, धारा-54 के तहत ध्वस्तीकरण या बेदखली की कार्रवाई से बचने के लिए नियमानुसार वैध किराएदार बनने का कानूनी विकल्प भी खुला रखा गया है। इसके लिए प्रक्रिया के तहत तय किराया जमा करना होगा, बोली प्रक्रिया में भाग लेना होगा और औपचारिक अनुबंध के बाद ही किरायेदारी को वैध माना जाएगा

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वहीं, मुस्लिम मामलों के जानकार खुरशीद अहमद का कहना है कि वक्फ एक धार्मिक व सामाजिक जिम्मेदारी है। सहस्रधारा क्रॉसिंग कब्रिस्तान जैसे विवादों का समाधान उलेमाओं को आगे आकर शरीयत के दायरे में निकालना चाहिए। यदि नियमित किराया तय कर उसका समय पर भुगतान किया जाए तो ऐसे कई पुराने विवाद आसानी से सुलझ सकते हैं