देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गांधी जयंती के अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री की जयंती की पूर्व संध्या पर दोनों महान विभूतियों का भावपूर्ण स्मरण करते हुए उन्हें शत-शत नमन किया है और अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की है। देहरादून से जारी अपने आधिकारिक संदेश में मुख्यमंत्री ने देश की आजादी, सुरक्षा और निर्माण में इन दोनों महापुरुषों के अतुलनीय योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों को समाज के लिए महान प्रेरणास्त्रोत बताया है।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का स्मरण करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा, प्रेम, सद्भाव और मानवता के उच्च मूल्यों को अपने जीवन का मुख्य आधार बनाया था। उनके विचार और आदर्श आज के आधुनिक दौर में भी पूरे समाज और संपूर्ण मानवता का सही मार्गदर्शन कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने देश को स्वतंत्रता दिलाने के कड़े संघर्ष में सत्य और अहिंसा को अपनी सबसे बड़ी और अचूक शक्ति बनाया था। उन्होंने समाज के हर एक वर्ग को साथ लेकर स्वतंत्रता आंदोलन को एक विशाल जन-आंदोलन का रूप दिया था।
गांधी जी के नेतृत्व ने देशवासियों के दिलों में स्वाधीनता, अपने स्वाभिमान तथा राष्ट्रीय एकता की भावना को बेहद मजबूत किया था। उनका पूरा जीवन हमें यह गहरी प्रेरणा देता है कि अटूट दृढ़ संकल्प, सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर बड़े से बड़े लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है।
मानवता के प्रति करुणा, समाज के जरूरतमंदों के प्रति गहरी संवेदनशीलता, आपसी प्रेम और भाईचारे की भावना को अपने दैनिक जीवन में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता से महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और स्वच्छता के संदेश को जीवन में पूरी तरह आत्मसात करने की अपील की है।
इसी क्रम में, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री की जयंती की पूर्व संध्या पर उन्हें भी भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शास्त्री जी का पूरा जीवन सादगी, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा का एक अनुपम उदाहरण है।
शास्त्री जी ने अपने व्यक्तिगत आचरण और कार्यशैली से यह पूरी तरह सिद्ध कर दिया था कि सादगी और मजबूत इच्छाशक्ति के साथ भी राष्ट्र के बड़े दायित्वों को सफलतापूर्वक निभाया जा सकता है। उन्होंने देश के बेहद कठिन दौर में नेतृत्व संभालकर राष्ट्र के आत्मविश्वास को नई मजबूती दी थी।
उनका अमर और लोकप्रिय नारा ‘जय जवान, जय किसान’ देश की सुरक्षा में तैनात सीमा के प्रहरियों और खाद्य आत्मनिर्भरता के लिए देश के अन्नदाताओं के योगदान के महत्व को रेखांकित करता है। यह प्रसिद्ध नारा आज भी देश के प्रत्येक नागरिक में राष्ट्रप्रेम और कर्तव्यबोध की भावना का सशक्त संचार करता है।

