चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले में विषम भौगोलिक परिस्थितियों और कड़ाके की ठंड के बीच 25 हिमाच्छादित गांवों में जनगणना का 80 प्रतिशत कार्य सफलता के साथ पूरा कर लिया गया है। गोपेश्वर से मिली रिपोर्ट के अनुसार, प्रगणक और सुपरवाइजर दुर्गम क्षेत्रों में घर-घर जाकर मैपिंग और जनगणना से संबंधित काम तेजी से निपटा रहे हैं। इस कार्य का सीधा लाभ सीमांत क्षेत्रों के उन परिवारों को मिलेगा जो सर्दियों में भारी हिमपात की शुरुआत से पहले निचले इलाकों में प्रवास करने की तैयारी में हैं।
जिला प्रशासन ने जनगणना प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए एक विस्तृत समय-सारणी तय की है, जिसके तहत स्थानीय निवासियों को 17 अगस्त से 31 अगस्त तक डिजिटल स्व-गणना की सुविधा दी गई थी, इसके बाद 21 से 23 सितंबर तक अधिकारियों की टीम ने ज्योतिर्मठ के मल्हारी क्षेत्र का भौतिक सत्यापन किया और अब 1 अक्टूबर से 5 अक्टूबर तक पूरे क्षेत्र में पुनरीक्षण कार्य संचालित किया जाएगा।
जिलाधिकारी के निर्देशों के तहत सहायक भूलेख अधिकारी के नेतृत्व में गठित प्रशासनिक टीम ने नीति और मल्लारी घाटी के प्रमुख हिमाच्छादित गांवों कोषा, मल्हारी, कैलाशपुर, फरकिया, गुरुगुटी, बांपा, गमशाली और नीति का दौरा कर चल रहे जनगणना कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। अधिकारियों ने प्रगणकों द्वारा की जा रही मैपिंग और डेटा प्रविष्टियों का प्रत्यक्ष मिलान किया।
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, चमोली जिले में ऐसे 25 हिमाच्छादित गांव चिह्नित किए गए हैं, जहां सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण जनजीवन ठप हो जाता है और ग्रामीण अपने मवेशियों सहित निचले क्षेत्रों में चले आते हैं। मौसमी पलायन से पहले इन गांवों में जनगणना पूरी कराना अनिवार्य था। पांच अक्टूबर तक पुनरीक्षण कार्य पूरा होते ही इन दुर्गम और सीमांत क्षेत्रों के सटीक आंकड़े दर्ज हो जाएंगे, जिससे भविष्य में विकास योजनाओं को लागू करने में मदद मिलेगी।

