देहरादून की आबोहवा में बड़ा सुधार: बारिश ने दून की हवा को बनाया यूरोप जैसा शुद्ध

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देहरादून में पिछले कुछ दिनों से हो रही निरंतर बारिश ने शहर की हवा को इतना स्वच्छ कर दिया है कि इसकी तुलना अब यूरोपीय देशों के शुद्ध वातावरण से की जा रही है। सामान्यतः मई के महीने में चिलचिलाती गर्मी और धूल भरी हवाओं के कारण यहाँ का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) काफी खराब रहता है, लेकिन इस बार रुक-रुक कर होने वाली बारिश ने धूल के कणों को जमीन पर बैठा दिया है। बुधवार को शहर का औसत AQI मात्र 8 दर्ज किया गया, जो पिछले पांच वर्षों में मई के पहले सप्ताह का सबसे न्यूनतम स्तर है। बारिश के कारण तापमान में भी भारी गिरावट आई है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिली है और पूरा वातावरण ताजगी से भर गया है।

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यूरोपीय मानकों के करीब पहुँचती दून की वायु गुणवत्ता

इस बार देहरादून की हवा की शुद्धता का स्तर यूरोप के विकसित देशों के समान पाया गया है। जहाँ यूरोप के अधिकांश देशों में नियमित बारिश और बर्फबारी के कारण धूल के कण हवा में नहीं टिक पाते, वहीं देहरादून में भी इस बार लंबी अवधि तक चली बारिश ने वैसा ही प्रभाव पैदा किया है। आमतौर पर यूरोपीय देशों में AQI का स्तर 15 से ऊपर जाते ही उसे खराब माना जाता है, जबकि भारत और अन्य एशियाई देशों में 50 से ऊपर के स्तर को खराब की श्रेणी में रखा जाता है। इस बार दून का AQI मात्र 8 तक गिर जाना यह दर्शाता है कि यहाँ की हवा वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार भी अत्यंत स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक हो गई है।

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बारिश और कम तापमान ने बदली शहर की सूरत

मई के महीने में देहरादून का तापमान अक्सर 38 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है, जिसके कारण शुष्क हवाएं धूल उड़ाती हैं और प्रदूषण का स्तर 50 से 100 के बीच, या कभी-कभी 200 तक भी पहुँच जाता है। लेकिन इस साल लगभग दस दिनों से जारी मानसूनी गतिविधियों के कारण तापमान 30 से 34 डिग्री के बीच बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि नमी के कारण हवा में मौजूद धूल के कण भारी होकर जमीन पर बैठ गए हैं और निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल भी बारिश की वजह से थम गई है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश की लंबी अवधि ने ही इस बार दून को प्रदूषण मुक्त बनाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।